न्यायपालिका की मर्यादा और गरिमा हमारे लोकतंत्र की रीढ़ है। जज न केवल न्याय प्रदान करते हैं, बल्कि न्यायिक प्रणाली का सम्मान भी उन्हीं से जुड़ा होता है। ऐसे में अगर कोई अधिवक्ता सार्वजनिक रूप से किसी न्यायाधीश को बिना पद या सम्मानसूचक संबोधन के पुकारता है, तो यह न केवल अनुचित है, बल्कि न्यायिक शिष्टाचार के विरुद्ध भी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वकील को ऐसी ही गलती के लिए सख्त फटकार लगाई।
2. घटना का विवरण:
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान वकील मैथ्यूज नेदुम्परा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को केवल उनके सरनेम “वर्मा” कहकर संबोधित किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने नाराजगी जताते हुए पूछा, “क्या वे आपके दोस्त हैं? वे अब भी जस्टिस वर्मा हैं।” कोर्ट ने कहा कि जब आप किसी उच्च पदस्थ न्यायाधीश की बात कर रहे हैं, तो शिष्टाचार और गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
3. वकील की प्रतिक्रिया और कोर्ट का रुख:
वकील ने जवाब में कहा, “मुझे नहीं लगता कि उन्हें इतनी इज्जत देनी चाहिए।” इस पर CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “प्लीज़, कोर्ट को ऑर्डर करने दीजिए।” कोर्ट ने न केवल फटकार लगाई बल्कि उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।
4. इससे जुड़ा बड़ा घटनाक्रम:
उधर, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही भी शुरू हो चुकी है। लोकसभा में 152 सांसदों ने उनके खिलाफ प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह मामला अब न्यायपालिका की गरिमा और उसकी स्वायत्तता से सीधे तौर पर जुड़ चुका है।







