असम में दूसरी बार सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के साथ शपथ लेने वाले नए कैबिनेट मंत्रियों में एक नाम छत्तीसगढ़ से भी जुड़ा है। भाजपा नेता रामेश्वर तेली मूल रूप से छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से संबंध रखते हैं। उनके पूर्वज करीब 140 साल पहले बालोद के घुमका गांव से असम के चाय बागानों में मजदूरी करने गए थे।
असम में आज भी 15 लाख से ज्यादा छत्तीसगढ़िया समुदाय के लोग चाय बागानों में काम कर रहे हैं। इन्हें अंग्रेजों के दौर में बंधुआ मजदूर बनाकर असम ले जाया गया था। पीढ़ियों से असम में रहने के बावजूद इस समाज ने अपनी छत्तीसगढ़ी बोली, सुआ नाचा और पारंपरिक संस्कृति को अब तक संभालकर रखा है।
रामेश्वर तेली ने दुलियाजन विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में जगह बनाई है। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार ध्रुबा गोगोई को हराया। इससे पहले वे 2014 और 2019 में डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने जा चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री सरभानंद सोनोवाल के लिए छोड़ दी थी।
राजनीति में बड़ा चेहरा बनने के बावजूद रामेश्वर तेली आज भी साधारण जीवन जीते हैं। वे दुलियाजान के टिपलिंग पुराना घाट इलाके में अपनी मां के साथ बांस और टिन से बने घर में रहते हैं। 2011 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने आजीविका चलाने के लिए मुर्गी पालन का काम शुरू किया था। कई बार उन्हें खेतों में सामान ले जाने के लिए खुद ठेला खींचते हुए भी देखा गया।
रामेश्वर तेली ने छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की थी। वे ऑल असम टी ट्राइब स्टूडेंट्स यूनियन में सक्रिय रहे और वहीं से उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। 12 जुलाई 1999 को वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। उस दौर में असम में भाजपा काफी कमजोर मानी जाती थी और कांग्रेस तथा असम गण परिषद का दबदबा था।
बाद में रामेश्वर तेली ने चाय बागान क्षेत्रों और पिछड़ा वर्ग समाज में मजबूत पकड़ बनाई। वे केंद्र की मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। उनके पिता बुद्धु तेली ड्राइवर थे, जबकि मां दुक्ला तेली चाय बागान में मजदूरी करती थीं। बचपन में वे अपने भाई भुवनेश्वर तेली के साथ पान-सुपारी बेचते थे। कई बार उन्होंने सड़क किनारे सब्जियां बेचकर भी परिवार का सहारा दिया।
9 नवंबर 2022 को केंद्रीय राज्य मंत्री रहते हुए वे पहली बार छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने मीडिया से छत्तीसगढ़ी भाषा में बातचीत कर सभी को चौंका दिया था। रामेश्वर तेली का ननिहाल धमतरी में है और वे अब तक अविवाहित हैं।



