रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। स्काउट्स एंड गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य अध्यक्ष पद से हटाए जाने के फैसले के खिलाफ रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि वे स्काउट्स एंड गाइड्स के निर्वाचित अध्यक्ष हैं और बिना किसी सूचना या प्रक्रिया के उन्हें पद से हटाना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि न तो उन्हें हटाने का कोई नोटिस दिया गया और न ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है।
इस कानूनी लड़ाई के बीच यह तथ्य सामने आया है कि करीब एक माह पहले ही स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को स्काउट्स एंड गाइड्स छत्तीसगढ़ का पदेन अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया था। बुधवार को इस संबंध में नियुक्ति आदेश सार्वजनिक हुए, जिससे विवाद और गहरा गया।
जारी आदेश के अनुसार, 12 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद गजेन्द्र यादव को अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया, जिसे 2 जनवरी 2026 को राज्य परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से अनुमोदन भी मिल गया। वहीं बृजमोहन अग्रवाल के कार्यालय से जारी प्रेस नोट में दोहराया गया कि वे अब भी अध्यक्ष हैं और उन्हें हटाने की प्रक्रिया अवैध है।
जंबूरी आयोजन भी विवादों में
अध्यक्ष पद विवाद के साथ-साथ प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आयोजन भी हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। बालोद जिले के दुधली में आयोजित हो रही इस जंबूरी के लिए राज्य सरकार ने 10 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जिसमें से 5 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।
जंबूरी से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्काउट्स एंड गाइड्स की जेम आईडी नहीं होने के कारण जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद को जेम पोर्टल के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया संचालित करने की अनुमति दी गई। कलेक्टर बालोद द्वारा गठित 9 सदस्यीय समिति इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है।
राज्य इकाई की ओर से बिजली, पानी, आवास सहित तमाम व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं, जबकि जंबूरी का संचालन राष्ट्रीय इकाई के दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है। आयोजन के लिए राष्ट्रीय और राज्य इकाई के बीच एमओयू भी किया गया है।
देशभर से लगभग 12 हजार रोवर-रेंजर, 1500 से अधिक स्टाफ और विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना दिया है, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर उपजे विवाद ने आयोजन पर राजनीतिक साया डाल दिया है।
अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि स्काउट्स एंड गाइड्स की सियासत में अगला मोड़ क्या होगा।






