छत्तीसगढ़ में बिजली बिलों में अचानक हुई बढ़ोतरी को लेकर घरेलू उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रदेश के कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं कि जिन घरों का मासिक बिजली बिल पहले 300 से 500 रुपये के बीच आता था, अब वही बिल 1,500 से 2,000 रुपये तक पहुंच गया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि 1 अगस्त 2025 से हाफ बिजली बिल योजना समाप्त होने और बिजली बिलों में PPC (पावर परचेज कॉस्ट) शुल्क जोड़े जाने के बाद बिलों में दोगुने-तिगुने की बढ़ोतरी हुई है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना पर्याप्त जानकारी और जागरूकता के बिलों में नए शुल्क जोड़ दिए गए, जिससे आम परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है। लोगों ने ऊर्जा विभाग से बढ़े हुए बिलों की समीक्षा कर राहत देने की मांग की है।
क्या है PPC शुल्क?
बिजली कंपनियों के अनुसार PPC (Power Purchase Cost) वह अतिरिक्त लागत है, जो बिजली उत्पादन और खरीद में होने वाले खर्चों के कारण उपभोक्ताओं से वसूली जाती है। इसमें ईंधन, कोयले के परिवहन, थोक बिजली खरीद और अन्य परिचालन लागतों का समायोजन शामिल होता है। अब यह राशि बिजली बिल में अलग लाइन-आइटम के रूप में जोड़ी जा रही है।
जुलाई 2025 में बढ़ा था टैरिफ
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा जुलाई 2025 में जारी नए टैरिफ आदेश के तहत बिजली दरों में वृद्धि की गई थी।
- घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी
- व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 25 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी
- कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी
नए आदेश के अनुसार बिजली की औसत बिलिंग दर 7.02 रुपये प्रति यूनिट तय की गई थी, जो पहले की तुलना में लगभग 1.89 प्रतिशत अधिक है।
उपभोक्ताओं की मांग
बढ़े हुए बिलों से परेशान उपभोक्ताओं ने सरकार और ऊर्जा विभाग से मांग की है कि:
- बिजली बिलों की जांच और पुनरीक्षण कराया जाए।
- PPC शुल्क की गणना और वसूली का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए।
- हाफ बिजली बिल योजना समाप्त होने के प्रभाव पर सरकार स्पष्टीकरण दे।
बिजली बिलों में आई इस बढ़ोतरी को लेकर अब प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस तेज होने लगी है। उपभोक्ता संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जा सकता है।






