ओपी चौधरी का सत्ता अहंकार मंत्री के पीए ओएसडी ने किया वरिष्ठ भाजपा सदस्यों का अपमान

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर, छत्तीसगढ़: प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक चिट्ठी की खूब चर्चा है, जो वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के बंगले पर छोड़ी गई थी। यह चिट्ठी भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं की पीड़ा को दर्शाती है, जिन्हें मंत्री से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और फिर भी वे उनसे मुलाकात नहीं कर पाए। इस घटना ने सत्तारूढ़ दल के भीतर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी को उजागर किया है।

क्या है पूरा मामला?

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ से जुड़े दिग्गज नेता, जिसमें पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, डॉ. अशोक त्रिपाठी , डॉ. अखिलेश दुबे, डॉ. कृष्णदास मानिकपुरी, डॉ. मनीष ठाकुर, डॉ. मनोज ठाकुर डॉ. साहू,और कई अन्य चिकित्सक व आरएसएस से जुड़े पदाधिकारी शामिल थे, मंत्री ओ.पी. चौधरी से मिलने उनके बंगले पहुंचे थे। बताया गया कि उन्होंने मंत्री के निजी सहायक से समय ले रखा था।

लेकिन, जैसे ही प्रतिनिधिमंडल बंगले पर पहुँचा, उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। काफी सवाल-जवाब के बाद और पीए से फोन पर बात होने के बाद ही उन्हें अंदर आने दिया गया। इसके बाद भी उन्हें करीब 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन मंत्री से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई।

चिट्ठी में छलका दर्द

लंबा इंतजार करने के बाद, निराशा और नाराजगी में प्रतिनिधिमंडल ने एक पत्र मंत्री के नाम पर छोड़ा। इस पत्र में उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा, “हम लोग सार्वजनिक काम को लेकर आए थे, परंतु आपके व्यवहार से हम निराश और हताश हुए।” पत्र में आगे यह भी कहा गया कि भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के लिए इस तरह की अपमानजनक स्थिति बेहद विचारणीय है।

सोशल मीडिया पर वायरल, फिर डिलीट

यह मामला तब सार्वजनिक हुआ जब डॉ. विमल चोपड़ा ने इस चिट्ठी को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। हालांकि, बाद में पोस्ट हटा दी गई, लेकिन तब तक इसके स्क्रीनशॉट वायरल हो चुके थे।

इस घटना के संबंध में जब वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी चिट्ठी की जानकारी नहीं है। वहीं, डॉ. अशोक त्रिपाठी ने भी सीधे तौर पर इस पर बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए उन्होंने इशारों में अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “अगर नेता जी पीए, ओएसडी के घेरे से घिरे रहकर जनता और अपने ही दल के कार्यकर्ता से दूरी बना लेंगे तो राजनीतिक दल का भविष्य कैसा होगा?”

यह घटना भाजपा के भीतर कार्यकर्ताओं की निराशा और सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेताओं तक पहुँचने में आ रही दिक्कतों को स्पष्ट रूप से दिखाती है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment