नई दिल्ली। देश में युवाओं को सरकारी नौकरियों में नियुक्ति पत्र बांटने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर कांग्रेस नेतृत्व सवाल खड़ा कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बयान देते हुए कहा कि अब प्रधानमंत्री को नौकरियों के अपॉइंटमेंट लेटर तक खुद बांटने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है। खड़गे ने कहा कि “नेहरू जी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी ने कभी ऐसा नहीं किया।”
इस पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि कोई प्रधानमंत्री खुद यह सुनिश्चित करता है कि देश के युवाओं को समय पर रोजगार मिले, तो कांग्रेस को उससे भी समस्या है। पीएम मोदी युवाओं को नौकरियां दिलाने के लिए अभियान चला रहे हैं, और इसी कड़ी में वे खुद अपॉइंटमेंट लेटर सौंप रहे हैं — ताकि युवाओं को यह भरोसा हो कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
भाजपा ने यह भी कहा कि कांग्रेस की सरकारें जहां-जहां हैं, वहां भी उनके नेता युवाओं को नौकरी देने का ऐसा कोई प्रयास नहीं कर रहे। लेकिन प्रधानमंत्री के प्रयासों पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। यह कांग्रेस के उस अहंकार को दिखाता है जिसे वह विपक्ष में रहते हुए भी नहीं छोड़ पा रही है।
राहुल गांधी का विवादित बयान:
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा को लेकर कहा कि उनकी सरकार आने पर वह उन्हें जेल में डाल देंगे। साथ ही यह भी कहा कि “उन्हें न मोदी बचा पाएंगे, न अमित शाह।”
इस पर भाजपा ने तीखा हमला करते हुए कहा कि यह बयान स्पष्ट करता है कि कांग्रेस आज भी खुद को संविधान और कानून से ऊपर समझती है। देश के संवैधानिक ढांचे में किसी मुख्यमंत्री को बिना प्रक्रिया के जेल भेजने की बात करना लोकतंत्र का अपमान है।
हिमंता बिस्वा सरमा का खुलासा:
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस छोड़ने के पीछे जो कारण बताए, वो भी अब चर्चा में हैं। उन्होंने बताया कि जब वे कांग्रेस में थे, तब एक बार राहुल गांधी से मिलने गए थे। उस समय राहुल गांधी अपने पालतू कुत्ते को उसी टेबल से बिस्किट खिला रहे थे, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता बैठकर चाय-नाश्ता कर रहे थे। यह घटना उन्हें अपमानजनक लगी, जिसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि पार्टी में नेताओं का अपमान और परिवारवाद इस हद तक पहुंच गया था कि नीतिगत विचारों की कोई जगह नहीं बची थी।
कांग्रेस नेतृत्व खुद कई मामलों में जमानत पर बाहर:
भाजपा ने इस बात को भी उठाया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी खुद ‘नेशनल हेराल्ड’ सहित कई मामलों में जमानत पर बाहर हैं, फिर भी वे कानून और न्यायपालिका पर सवाल उठा रहे हैं।
दो पार्टियों का अंतर:
भाजपा ने कहा कि यही फर्क है कांग्रेस और भाजपा में—एक पार्टी खुद को कानून से ऊपर मानती है, जबकि दूसरी कानून के दायरे में रहकर काम करती है
प्रधानमंत्री मोदी का युवाओं को रोजगार देने का अभियान अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस जहां इसे प्रचार कह रही है, वहीं भाजपा इसे “नई राजनीति” और “जवाबदेही की संस्कृति” बता रही है। जनता किसे सही मानती है, यह आने वाला समय तय करेगा।



