नई दिल्ली।देश के बैंकों में ग्राहकों की बिना दावे की जमा राशि (Unclaimed Deposits) का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार ने संसद को जानकारी दी है कि 30 जून 2025 तक यह राशि 67,003 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिसमें अकेले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की हिस्सेदारी करीब 29 फीसदी है। यह आंकड़े उन खातों के हैं जिनमें वर्षों से कोई लेन-देन नहीं हुआ और जिन्हें ग्राहकों या उनके उत्तराधिकारियों ने अब तक क्लेम नहीं किया है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे अधिक राशि
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 58,330.26 करोड़ रुपये और निजी क्षेत्र के बैंकों में 8,673.72 करोड़ रुपये की बिना दावे की जमा राशि दर्ज है।
- एसबीआई के पास सबसे ज्यादा ₹19,329.92 करोड़
- पंजाब नेशनल बैंक के पास ₹6,910.67 करोड़
- केनरा बैंक के पास ₹6,278.14 करोड़
निजी बैंकों का योगदान भी बड़ा
- आईसीआईसीआई बैंक: ₹2,063.45 करोड़
- एचडीएफसी बैंक: ₹1,609.56 करोड़
- एक्सिस बैंक: ₹1,360.16 करोड़
UDGAM पोर्टल से मिलेगी जानकारी
जनता की सुविधा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने UDGAM पोर्टल की शुरुआत की है, जहां कोई भी उपयोगकर्ता विभिन्न बैंकों में अपनी बिना दावे की जमा राशि की जानकारी प्राप्त कर सकता है। 1 जुलाई 2025 तक इस पोर्टल पर 8.59 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण किया है।
बिना दावे की राशि का उपयोग
मंत्री ने बताया कि इन राशियों का उपयोग “जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता निधि योजना 2014” के तहत जमाकर्ताओं के हितों को बढ़ावा देने में किया जाता है। यह राशि किसी लाभ के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए उपयोग की जाती है।
ईडी ने 49 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की
एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने जानकारी दी कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले 10 वर्षों में 49 पीएमएलए मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। इस दौरान कुल 5,892 मामलों की जांच की गई और 1,398 अभियोजन शिकायतें विशेष अदालतों में दाखिल की गईं।



