70 से अधिक देशों ने किया समर्थन: AI इंपैक्ट समिट 2026 में भारत बना ग्लोबल टेक हब

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली।भारत में आयोजित AI Impact Summit 2026 ने वैश्विक तकनीकी मंच पर एक नई पहचान बनाई है। इस बार 70 से अधिक देशों ने साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, और उम्मीद जताई जा रही है कि यह आंकड़ा 80 के पार जा सकता है। सम्मेलन का औपचारिक समापन आज किया जाएगा, जहां घोषणापत्र सार्वजनिक रूप से जारी होगा।

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भारत को भरोसेमंद भागीदार के रूप में देख रही है। पिछले सम्मेलन में जहां करीब 60 देशों ने समर्थन दिया था, वहीं इस बार यह संख्या 70 पार कर चुकी है।

 अमेरिका की रणनीति: साझेदारी, निर्यात और नेतृत्व

सम्मेलन में अमेरिका ने भी एआई क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने और अपनी तकनीकों के निर्यात को बढ़ाने की रणनीति सामने रखी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व माइकल क्रैट्सियोस ने किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पूर्ण आत्मनिर्भरता की बजाय रणनीतिक साझेदारी ज्यादा व्यावहारिक मॉडल है।

अमेरिका ने “नेशनल चैंपियंस इनिशिएटिव” और “यूएस टेक कॉर्प्स” जैसी पहलों की घोषणा की, जिनके तहत पार्टनर देशों को अमेरिकी एआई स्टैक से जोड़ा जाएगा और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी।

 250 अरब डॉलर से अधिक निवेश की प्रतिबद्धता

समिट के दौरान बुनियादी ढांचे में 250 अरब डॉलर से अधिक निवेश की प्रतिबद्धता सामने आई। एआई प्रदर्शनी में 5 लाख से ज्यादा लोगों की भागीदारी ने इसे जन-आधारित टेक इवेंट बना दिया।

 रक्षा क्षेत्र में एआई का प्रदर्शन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत मंडपम में सेना के पवेलियन का दौरा किया। यहां जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली, ड्राइवर थकान पहचान तकनीक और कई एआई-संचालित रक्षा उपकरण प्रदर्शित किए गए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एआई विजन मानवता को सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार दुनिया की ओर ले जाता है।

 गूगल की बड़ी घोषणा

समिट से पहले सुंदर पिचाई ने भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि Google ने “India-US Connect Initiative” के तहत नए सब-सी केबल रूट विकसित करने की घोषणा की है, जिससे दोनों देशों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

पिचाई ने भारत की डिजिटल नीतियों — आधार, यूपीआई और डिजीलॉकर जैसे मॉडल — को वैश्विक एआई विकास का मजबूत आधार बताया।

 स्वदेशी एआई पर जोर

स्वदेशी स्टार्टअप सर्वम एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने कहा कि यदि भारत ने अपनी बुनियादी एआई तकनीक विकसित नहीं की, तो डिजिटल उपनिवेश बनने का खतरा रहेगा। उनका मानना है कि भारत को जमीनी स्तर से एआई सिस्टम विकसित करने होंगे।

 नवाचार से घटेगी लागत

मंत्री वैष्णव ने संकेत दिया कि एआई नवाचार से बिजली की लागत में 50% तक कमी संभव है। इससे चिप निर्माण की लागत भी घटेगी। भारत इस मौके का फायदा उठाकर अपनी सेमीकंडक्टर रणनीति को नए युग के अनुरूप ढालना चाहता है।

 जनहित में एआई

नीति विशेषज्ञों ने कहा कि एआई की असली सफलता तभी मानी जाएगी जब उसका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में समावेशी विकास के लिए हो। कंप्यूटिंग क्षमता को सर्वसुलभ और किफायती बनाना भारत का प्रमुख लक्ष्य है।

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