NRDA में दो-दो चीफ इंजीनियर! चहेते को रेवड़ी की तरह बांट रहे करोड़ों के टेंडर

Madhya Bharat Desk
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रायपुर: नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) इन दिनों अपने अजीबोगरीब प्रशासनिक कारनामों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को रेवड़ियां बांटने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे को हैरान कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि यह देश की इकलौती ऐसी विकास एजेंसी बन गई है, जहाँ एक ही समय में एक ही पद पर दो-दो लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

एक पद, दो अधिकारी
आमतौर पर किसी भी सरकारी विभाग या प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर का केवल एक ही सर्वोच्च पद होता है। लेकिन नवा रायपुर विकास प्राधिकरण में नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए इस पद पर दो अफसरों को बैठाया गया है। एक तरफ इस पद पर हरिओम शर्मा तैनात हैं। वहीं दूसरी तरफ बी.आर. अग्रवाल भी इसी पद पर समानांतर रूप से काबिज हैं।

देश के किसी भी अन्य राज्य या केंद्रीय एजेंसी में ऐसी व्यवस्था देखने को नहीं मिलती, जो इस संस्थान की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है।

EE से सीधे चीफ
सूत्रों के मुताबिक, बी.आर. अग्रवाल पहले नगर निगम में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) के पद पर पदस्थ थे। प्रशासनिक नियमों के अनुसार, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से चीफ इंजीनियर बनने के सफर में कई प्रमोशन और सालों का अनुभव आड़े आता है। लेकिन नवा रायपुर प्राधिकरण ने सारे नियमों को बायपास करते हुए अग्रवाल को सीधे चीफ इंजीनियर के भारी-भरकम और मलाईदार पद पर लैंड करा दिया।
आखिर ऐसी क्या मजबूरी या सेटिंग थी, जिसके कारण एक नगर निगम के EE को सीधे राज्य के सबसे वीआईपी विकास प्राधिकरण का तकनीकी मुखिया बना दिया गया?

चहेतों को टेंडर
बी.आर. अग्रवाल के आने के बाद से प्राधिकरण में भ्रष्टाचार के आरोप चरम पर हैं। विभागीय सूत्रों और ठेकेदारों के बीच दबी जुबान में चल रही चर्चाओं के अनुसार, अब टेंडर प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता रह गई है। टेंडर की शर्तें विकास कार्यों को देखकर नहीं, बल्कि पहले से तय खास दो-तीन ठेकेदारों की प्रोफाइल देखकर बनाई जाती हैं। ताकि कोई और रेस में शामिल ही न हो सके।

हाल ही में आए एक टेंडर का उदाहरण देते हुए सूत्रों ने बताया कि शर्तों में जानबूझकर लिखा गया कि केवल नीली मशीन (विशिष्ट मशीनरी) से काम करने का अनुभव रखने वाले ही पात्र होंगे। यह शर्त साफ इशारा करती है कि टेंडर उसी को देना था, जिसके पास वह मशीन उपलब्ध थी।
विभागीय साठगांठ का आलम यह है कि लगभग हर टेंडर की बेस प्राइज या फाइनल वैल्यू बाजार दर से 10 से 15 प्रतिशत अधिक रखी जा रही है, जिससे सरकारी खजाने को सीधे तौर पर चूना लगाया जा रहा है।

जांच के घेरे में प्राधिकरण
एक ही पद पर दो अधिकारियों का होना और टेंडरों में लगातार हो रही गड़बड़ियां इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जनता के टैक्स के पैसे का इस कदर बंदरबांट और प्रशासनिक पदों का ऐसा मजाक पहले कभी नहीं देखा गया। अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले पर शासन स्तर से क्या कार्रवाई होती है, या फिर ऊपर तक पहुंच के दम पर यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

वेबसाइट से गायब हैं अफसर के संपर्क सूत्र
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता के इस खेल में पारदर्शिता को किस तरह ताक पर रखा गया है, इसका अंदाजा नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट को देखकर लगाया जा सकता है। प्राधिकरण के ऑर्गनाइजेशनल सेटअप वाले पेज पर विभाग के छोटे से लेकर बड़े, सभी अधिकारियों के नाम, उनके पद और उनके संपर्क नंबर साफ तौर पर दर्ज हैं। लेकिन हैरत की बात यह है कि पूरे महकमे में केवल ये बी.आर. अग्रवाल ही ऐसे इकलौते अधिकारी हैं, जिनके नाम के आगे न तो कोई संपर्क नंबर दिया गया है और न ही कोई आधिकारिक जानकारी साझा की गई है।

यह साफ तौर पर दर्शाता है कि नियमों को ठेंगा दिखाकर मलाईदार पदों पर बैठे ये अफसर जनता और मीडिया के सवालों से बचने के लिए खुद को पूरी तरह से पर्दे के पीछे रखना चाहते हैं। आखिर देश की इकलौती एजेंसी के इन अनोखे अफसरों का संपर्क नंबर सार्वजनिक करने से प्राधिकरण को किस बात का डर है?

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