गुजरात के भावनगर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो आजकल की राजनीति में बहुत कम देखने को मिलती है। यहां के पूर्व महापौर भरत भाई बारड ने अपना कार्यकाल पूरा होते ही फिर से अपनी पुरानी वेल्डिंग की दुकान संभाल ली है।
पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने सादगी और मेहनत वाली जिंदगी नहीं छोड़ी। यही वजह है कि उनकी ईमानदारी और सरल जीवन की चर्चा सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हो रही है।
भरत भाई बारड साल 2024 से 2026 तक भावनगर के महापौर रहे। इतने बड़े पद पर रहने के बावजूद वे आज भी किराए के मकान में रहते हैं और जमीन से जुड़े इंसान बने हुए हैं।
उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद करीब 40 साल पहले परिवार चलाने के लिए वेल्डिंग का काम शुरू किया था। महापौर का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने फिर से वही काम शुरू कर दिया और अब रोज अपनी दुकान पर काम करते नजर आते हैं।
भरत भाई बताते हैं कि उनकी मां फूल-माला बेचकर घर चलाती थीं और हमेशा उन्हें ईमानदारी और मेहनत से जीने की सीख देती थीं। उसी सीख को अपनाकर उन्होंने राजनीति में रहते हुए भी कभी गलत तरीके से पैसे कमाने की कोशिश नहीं की।






