लिवर इंफेक्शन बन सकता है जानलेवा, जानिए इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

Madhya Bharat Desk
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लिवर से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक हेपेटाइटिस-बी इस संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है। इस वायरस से प्रभावित होने पर व्यक्ति को लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई मामलों में यह संक्रमण कुछ महीनों में ठीक हो जाता है, लेकिन यदि यह लंबे समय तक बना रहे तो यह लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, हर साल करीब 8 लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवाते हैं। इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

हेपेटाइटिस-बी क्या है और कैसे फैलता है?

हेपेटाइटिस-बी एक वायरल इंफेक्शन है जो लिवर को प्रभावित करता है। यह संक्रमण मुख्यतः एचबीवी वायरस के कारण होता है, जो शरीर के तरल पदार्थ जैसे कि खून, वीर्य या संक्रमित सुई के माध्यम से फैलता है। यह वायरस छींकने या खांसने से नहीं फैलता।

जोखिम में कौन लोग आते हैं?

  • स्वास्थ्यकर्मी
  • संक्रमित रक्त के संपर्क में आने वाले लोग
  • असुरक्षित यौन संबंध रखने वाले व्यक्ति
  • संक्रमित माँ से नवजात शिशु
  • टैटू या पियर्सिंग करवाने वाले लोग (यदि उपकरण साफ न हों)

हेपेटाइटिस-बी के लक्षण पहचानें:

संक्रमण के बाद 2 से 16 सप्ताह के भीतर इसके लक्षण सामने आ सकते हैं। इनमें से कुछ लक्षण निम्न हैं:

  • लगातार बुखार और पेट दर्द
  • त्वचा और आंखों में पीलापन (पीलिया)
  • गहरे रंग का पेशाब
  • जोड़ों में दर्द
  • भूख न लगना
  • सामान्य कमजोरी और थकान

लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

हेपेटाइटिस-बी से कैसे बचें?

इस खतरनाक संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये सावधानियां:

  • टीकाकरण: 19 से 59 वर्ष की आयु के लोगों के लिए हेपेटाइटिस-बी का टीका उपलब्ध है।
  • सुरक्षित यौन संबंध बनाए रखें।
  • गंदे या बिना स्टरलाइज किए गए उपकरणों से टैटू या पियर्सिंग न करवाएं।
  • शरीर में इंजेक्शन लगवाने से पहले सुई की स्वच्छता सुनिश्चित करें।
  • नशे या प्रतिबंधित दवाओं के सेवन से बचें।

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