PWD में करोड़ों का खेल? RTI ने खोले टेंडर के राज, जवाब देने से बचे अधिकारी

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की विद्युत यांत्रिकी शाखा में टेंडर आवंटन को लेकर बड़ा कथित घोटाला सामने आया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान करीब 4 करोड़ 22 लाख रुपये के आठ टेंडरों में नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। पूरे मामले की लिखित शिकायत राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रमुख अभियंता से की गई है, जिसमें जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

आरटीआई दस्तावेजों के अनुसार, कई ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान लिखित आवेदन देकर अपने वित्तीय लिफाफे (फाइनेंशियल बिड) नहीं खोलने का अनुरोध किया। आरोप है कि ऐसा सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि सिंडिकेट के पसंदीदा ठेकेदार को सबसे कम दर पर काम मिल सके और बाकी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से बाहर हो जाएं। शिकायत में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता टी.आर. कुंजाम को इस कथित सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है।

दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि संदीप भोंसले, पी एंड वॉय एसोसिएट, सागर शर्मा, अंकिता इलेक्ट्रिकल्स, भारत कंस्ट्रक्शन, डीएम झा, सुपरटेक सॉल्यूशन्स, पराग इंफ्रा और एनके ट्रेडर्स जैसे ठेकेदारों ने कई मामलों में वित्तीय लिफाफा नहीं खोलने के आवेदन दिए। इसके बावजूद न तो उनकी अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) जब्त की गई और न ही उनके खिलाफ नियमानुसार कोई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। उल्टे उन्हें ईएमडी लौटाकर आगे कार्यादेश जारी किए जाने का आरोप है।

नियमों के मुताबिक, यदि कोई टेंडरकर्ता निर्धारित 120 दिनों की अवधि से पहले अपने प्रस्ताव से पीछे हटता है या वित्तीय लिफाफा नहीं खोलने का आवेदन देता है, तो उसकी ईएमडी जब्त की जा सकती है। बार-बार ऐसा करने पर संबंधित ठेकेदार का पंजीयन दो वर्ष तक निलंबित करने का भी प्रावधान है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन नियमों का पालन नहीं किया गया।

कथित अनियमितताओं से जुड़े प्रमुख कार्यों में रायपुर सब-डिवीजन का 45.04 लाख रुपये का इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य, कबीर नगर-हीरापुर का 65 लाख रुपये का डिपॉजिट कार्य, विधानसभा सब-डिवीजन में 93.36 लाख रुपये की एचटी-एलटी लाइन शिफ्टिंग, रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय का 41.87 लाख रुपये का ऑडियो-वीडियो सिस्टम रिनोवेशन सहित बलौदाबाजार और पंचशील नगर के कुल आठ कार्य शामिल बताए गए हैं।

मामले में पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश बंसल ने कहा, “मैं इस पूरे मामले की जांच करवाता हूं। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी और फाइलें तलब की जाएंगी।”

वहीं, मुख्य अभियंता, विद्युत यांत्रिकी मंडल टी.आर. कुंजाम ने कहा, “मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना है। आरटीआई से क्या जानकारी मिली है और उसमें क्या दावे हैं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”

मुख्य अभियंता के इस बयान के बाद मामले को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। गंभीर आरोपों और आरटीआई दस्तावेजों के सामने आने के बावजूद विभाग की ओर से आरोपों पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया गया। अब पूरे मामले में विभागीय जांच और उसके निष्कर्षों पर सबकी नजर है कि आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं तथा यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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