महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कथित रूप से एक निजी कंपनी द्वारा नेशनल हाईवे के समानांतर अवैध सड़क निर्माण का मामला सामने आया है। आरोप है कि कृपा करणी पावर लिमिटेड द्वारा ग्राम तुमगांव के पास खसरा नंबर 89, ग्राम कौवाजर क्षेत्र में एक प्राइवेट ठेकेदार के माध्यम से समानांतर सड़क का निर्माण कराया जा रहा था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण निजी उपयोग के उद्देश्य से किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि इस कार्य का ठेका निर्णय चौधरी ने ठेकेदार मेला राम को दिया था।
मामले की जानकारी मिलने पर राज्य आंदोलनकारी और छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल दुबे के अगुवाई में छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा और सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का विरोध किया। ग्रामीणों ने डायल 112 पुलिस को बुलाकर कथित अवैध निर्माण को रुकवाया। इसके बाद इस संबंध में नेशनल हाईवे प्राधिकरण कार्यालय अनुपम नगर, रायपुर और नेशनल हाईवे धमतरी में भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
किसानों का आरोप है कि मामले में कार्रवाई करने के बजाय इसे दबाने और लीपापोती करने का प्रयास किया गया। अनिल दुबे ने कहा कि यदि नेशनल हाईवे की जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में कलेक्टर और एसडीएम स्तर पर कार्रवाई नहीं होती, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आम नागरिक और किसान स्वयं सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
इसी आधार पर छत्तीसगढ़ की किसान महिलाओं राधाबाई सिन्हा और श्यामा बाई ध्रुव ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। इस याचिका में परियोजना निदेशक, नेशनल हाईवे (अनुपम नगर, रायपुर), भारत सरकार के मुख्य सचिव (नेशनल हाईवे) तथा महासमुंद कलेक्टर विनय लहंगे को पक्षकार बनाया गया है।
किसानों का कहना है कि वे इस मामले में पारदर्शी जांच और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।







