बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से पुलिस की बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। रतनपुर थाना क्षेत्र के पोड़ी गांव में पदस्थ दो आरक्षकों को अवैध शराब बेचने के मामले में ग्रामीणों ने रंगे हाथों पकड़ लिया। पूरे घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों ने पंचायत बुलाई, जहां दोनों आरक्षकों को गांव वालों से हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी। यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
ऐसे खुला खेल, गांववालों ने किया भंडाफोड़
जानकारी के अनुसार, आरक्षक संजय खांडे अपने साथी के साथ कुंआजती गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने एक शराब तस्कर को 50 लीटर अवैध शराब के साथ पकड़ा। लेकिन थाने लाने के बजाय बीच रास्ते में उससे 40 हजार रुपये लेकर उसे छोड़ दिया। इसके बाद जब्त की गई शराब दूसरे कोचिए को बेच दी गई।
इधर, शराब लेकर जा रहे युवकों को ग्रामीणों ने रोक लिया और पूछताछ की। तब पूरी सच्चाई सामने आ गई। ग्रामीणों ने तय किया कि मामला थाने तक ले जाने के बजाय गांव की पंचायत में रखा जाएगा। रात में बुलाए गए पंचायत में जब दोनों आरक्षकों को हाजिर किया गया, तो उन्होंने पहले आनाकानी की। लेकिन शिकायत की धमकी के बाद वे आए और पंचायत में गांववालों के सामने माफी मांगी।
अधिकारियों तक पहुंची खबर, कार्रवाई गायब
घटना की जानकारी अगले ही दिन उच्च अधिकारियों तक पहुंच गई। लेकिन आश्चर्य की बात है कि अब तक आरोपित पुलिसकर्मियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि आरोप है कि आरक्षकों ने साक्ष्य भी मिटाने की कोशिश की और उस व्यक्ति से मोबाइल की कॉल रिकॉर्डिंग डिलीट करवाई, जिसने पूरा मामला कैद किया था।
गांवों में गुस्सा, पुलिस की किरकिरी
यह मामला अब सिर्फ पोड़ी और कुंआजती गांव तक सीमित नहीं रहा। आसपास के इलाकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस और कोचियों की मिलीभगत से अवैध शराब का धंधा लगातार बढ़ रहा है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
SSP ने दिया कड़ा बयान
मामले पर बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मियों की यह करतूत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में अवैध शराब और नशे के खिलाफ सख्त अभियान चल रहा है और इसमें लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई तय है।







