आदिवासियों को 400 करोड़ मुआवजा, लेकिन 10 हजार से ज्यादा निकालने पर लगेगी SDM की अनुमति

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के उदयपुर ब्लॉक में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) की कोल ब्लॉक परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले आदिवासी भू-स्वामियों को करीब 400 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जा रहा है। राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जा रही है।

हालांकि, पूर्व अनुभवों को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर विलास भोसकर ने नया नियम लागू किया है। इसके तहत 10 हजार रुपए से अधिक की निकासी के लिए भू-स्वामियों को एसडीएम उदयपुर से लिखित अनुमति लेनी होगी। अनुमति तभी दी जाएगी जब राशि का सही उपयोग साबित हो।

पहले मुआवजा राशि का हुआ था दुरुपयोग
2012-13 में पहली बार लगभग 350 करोड़ का मुआवजा वितरित किया गया था। लेकिन बड़ी रकम मिलने के बाद कई भू-स्वामी ठगी और चिटफंड कंपनियों के जाल में फंस गए। महंगी गाड़ियां, सोने-चांदी के गहनों और गैर-जरूरी खर्चों में पैसे उड़ गए। नतीजा यह हुआ कि राशि खत्म होने के बावजूद जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ।

नया नियम क्यों जरूरी?
कलेक्टर भोसकर के मुताबिक, कई मामलों में देखा गया कि करोड़ों पाने के बावजूद लाभार्थियों ने अव्यवहारिक खर्च किए। यहां तक कि जिन्हें वाहन चलाना नहीं आता था, उन्होंने भी लाखों खर्च कर गाड़ियां खरीद लीं। नतीजतन दुर्घटनाएं बढ़ीं और कई जीवन असमय समाप्त हो गए।

अब नए आदेश के अनुसार, आदिवासी और अत्यंत पिछड़ी जनजातियां जैसे पंडो, पहाड़ी कोरवा और मझवार समुदायों के भू-स्वामी 10 हजार से अधिक की राशि तभी निकाल सकेंगे जब SDM उदयपुर लिखित अनुमति देंगे। साथ ही, निकासी नकद के बजाय ऑनलाइन भुगतान के रूप में होगी ताकि लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड रहे।

कलेक्टर का कहना है
“आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए यह नियम लागू किया गया है। जब तक मुआवजा वितरण जारी रहेगा, आदेश प्रभावी रहेगा।”
विलास भोसकर, कलेक्टर सरगुजा

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