विकासखंड अभनपुर के ग्राम सोनसिल्ली स्थित शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला में शुक्रवार को जो दृश्य सामने आया, वह केवल एक गांव की नाराज़गी नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर है। जर्जर स्कूल भवन से परेशान ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, पालकों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर प्रदर्शन किया। लगातार बारिश के बीच प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर “नया स्कूल भवन दो” के नारे लगाते रहे। विडंबना यह रही कि शिक्षक भी कुछ दूरी पर खड़े होकर पूरी स्थिति के मूकदर्शक बने रहे, क्योंकि समस्या उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थी।
जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर बच्चे
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में दो पालियों में संचालित होते हैं। दोनों भवन इतने जर्जर हो चुके हैं कि कभी भी ढह सकते हैं। लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में हर दिन बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शिक्षा का अधिकार तब तक अधूरा है, जब तक बच्चों को सुरक्षित विद्यालय उपलब्ध नहीं कराया जाता।

एक सप्ताह पहले भी हुआ था हादसा
यह पहला मामला नहीं है। महज़ एक सप्ताह पहले बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा क्षेत्र के खमरिया ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत दर्री के आश्रित ग्राम गुवारा स्थित प्राथमिक शाला की छत गिरने से कई मासूम बच्चे घायल हो गए थे। सौभाग्य से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश के अनेक सरकारी विद्यालय बच्चों के लिए शिक्षा का केंद्र कम और दुर्घटना का खतरा अधिक बन चुके हैं। https://www.madhyabharatparidrishya.com/2026/07/14/bemetara-government-school/
आंकड़े बता रहे हैं भयावह सच्चाई
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा सरकारी आंकड़ों से लगाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ में लगभग 8,106 सरकारी स्कूल भवन जर्जर अवस्था में हैं, जिनमें से करीब 3,789 भवन अत्यंत खतरनाक स्थिति में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा लगभग 1,525 स्कूलों में शौचालय, भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एक ही कमरे में कई कक्षाएं संचालित होना आम बात है।

सोनसिल्ली और गुवारा जैसी घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का संकेत हैं। यदि समय रहते स्कूल भवनों का सर्वेक्षण, मरम्मत और पुनर्निर्माण कराया गया होता, तो ऐसी परिस्थितियां शायद उत्पन्न ही नहीं होतीं।





