छत्तीसगढ़ी अस्मिता और अधिकारों की आवाज बनकर निकली छत्तीसगढ़ महतारी अस्मिता रथ यात्रा को प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। रविवार को यह यात्रा तोरेसिंघा, जगदीशपुर और खपरी सहित कई गांवों से होकर गुजरी, जहां स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक रथ का स्वागत किया।
इस दौरान लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी भी खुलकर सामने आई। तुमगांव थाने में “छत्तीसगढ़ महतारी” को बंदी बनाए जाने के विरोध में मुख्यमंत्री विष्णु देव से इस्तीफे की मांग उठी। साथ ही जिलाधीश विनय लहंगे और अजय त्रिपाठी को बर्खास्त करने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की गई।
रथ यात्रा के दौरान भाजपा सरकार पर “कथनी और करनी में अंतर” का आरोप लगाया गया और भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए गए। खल्लारी मंदिर और रोपवे से जुड़ी घटना का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने प्रशासनिक लापरवाही को श्रद्धालुओं की मौत का कारण बताया। इस मामले में मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
यह रथ यात्रा सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकाली जा रही है, जिसका नेतृत्व राज्य निर्माण संग्राम सेनानी लालाराम वर्मा के साथ बृजबिहारी साहू, अशोक कश्यप, मोतीराम नायक, मोहित भोई और प्रेमलाल पटेल कर रहे हैं।
गांव-गांव में आयोजित सभाओं को संबोधित करते हुए लालाराम वर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र के किसानों और युवाओं ने राज्य आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी और अब एक बार फिर अस्मिता की रक्षा के लिए आगे आने का समय है।
वहीं किसान नेता मोतीराम नायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ी पहचान और सम्मान की लड़ाई में किसान और युवा मिलकर संघर्ष करेंगे।
सभा में अन्य नेताओं के साथ लोक कलाकार लक्ष्मी नारायण निषाद ने भी अपनी बात रखी और लोगों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की।







