नई दिल्ली/हल्द्वानी।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धीकरण यज्ञ’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। मामला संसद तक पहुंच गया है। खड़गे ने इसे अपना अपमान बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि उन्होंने रैली के दौरान किसी धर्म या समाज के खिलाफ कोई बात नहीं कही थी, लेकिन उनके भाषण के बाद मंच का शुद्धीकरण कराया गया।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कराई जाएगी। राज्यसभा सभापति ने भी घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
आखिर शुद्धीकरण क्यों कराया गया?
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की ‘विजय शंखनाद रैली’ आयोजित हुई थी। रैली के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से शुद्धीकरण यज्ञ कराया गया।
संगठन का कहना है कि खड़गे के पुराने बयानों को सनातन विरोधी मानते हुए धार्मिक आस्था के कारण यह यज्ञ कराया गया। संगठन ने किसी जाति या समुदाय का अपमान करने के आरोप से इनकार किया है।
वहीं कांग्रेस ने इस घटना को दलित विरोधी मानसिकता और सामाजिक भेदभाव से जोड़ते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बीजेपी ने भी इस विवाद से दूरी बना ली है। पार्टी का कहना है कि शुद्धीकरण यज्ञ में बीजेपी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं था और इस आयोजन का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।
अब यह विवाद सिर्फ एक यज्ञ तक सीमित नहीं रह गया है। मामला जाति, सनातन, सामाजिक सम्मान और राजनीति से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच नए टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।







