क्या कानून से ऊपर पहुंच गई बालको? हाईकोर्ट आदेश की अवहेलना!

Madhya Bharat Desk
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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यशैली और कानून के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन पर BALCO की बाउंड्रीवाल का निर्माण लगातार जारी है, जिससे पूरे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

बेलाकछार नदी किनारे और नेहरू नगर क्षेत्र में चल रहे इस निर्माण कार्य को लेकर नगर पालिक निगम ने 02 फरवरी और 03 फरवरी 2026 को दो अलग-अलग नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों में साफ तौर पर कहा गया था कि बाउंड्रीवाल का निर्माण बिना अनुमति किया जा रहा है और इसे तत्काल प्रभाव से रोका जाए। निगम ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 293, 302 और 307 का हवाला देते हुए चेतावनी दी थी कि यदि निर्माण नहीं रोका गया तो कार्रवाई की जाएगी और खर्च की वसूली भी संबंधित पक्ष से की जाएगी।

इसके बावजूद जमीनी स्थिति पूरी तरह अलग नजर आई। मौके पर मजदूर लगातार काम करते दिखे, मशीनें चलती रहीं और बाउंड्रीवाल का निर्माण बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ता रहा। नोटिस जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य का न रुकना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है।

मामला बढ़ने पर यह सीधे हाईकोर्ट पहुंचा, जहां WPC No. 1091/2026 के तहत याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद BALCO प्रबंधन निर्माण कार्य जारी रखे हुए है और प्रशासन इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कलेक्टर और नगर पालिक निगम को स्पष्ट निर्देश दिए कि नोटिस के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और 30 दिनों के भीतर उचित कदम उठाए जाएं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश सामने है, तो मौके पर निर्माण कार्य अब भी कैसे जारी है। क्या आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं या फिर उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।

इस पूरे मामले में BALCO के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, सीईओ राजेश कुमार और प्रशासनिक प्रमुख कैप्टन धनंजय मिश्रा की कार्यशैली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि पहले निर्माण कार्य शुरू किया गया और बाद में आवश्यक अनुमति प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया गया।

निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार हेमस कॉर्पोरेशन की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या ठेकेदार को जमीन की कानूनी स्थिति, नगर निगम के नोटिस और कोर्ट में चल रहे मामले की जानकारी नहीं थी, या फिर इन सबके बावजूद काम जारी रखा गया।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि बाउंड्रीवाल का निर्माण सरकारी आबादी भूमि पर किया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही साबित होता है, तो मामला केवल बिना अनुमति निर्माण का नहीं बल्कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का रूप ले सकता है, जो कि एक गंभीर कानूनी मुद्दा है।

इस निर्माण का सीधा असर आसपास के ग्रामीणों पर भी पड़ रहा है। दोन्द्रो बेला गांव के निवासियों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। जो रास्ता वर्षों से उपयोग में था, वह अब बाउंड्रीवाल के कारण अवरुद्ध हो चुका है, जिससे ग्रामीणों को शहर आने-जाने के लिए कई किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।

इस मामले में BALCO के PRO विजय वाजपेई से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं है।

अब स्थिति यह है कि नगर निगम ने नोटिस जारी कर दिए हैं, हाईकोर्ट ने 30 दिनों के भीतर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य अब भी जारी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार इस पूरे मामले में कानून का पालन कौन सुनिश्चित करेगा और क्या प्रशासन वास्तव में सख्त कदम उठाएगा या यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाएगा।

फिलहाल तस्वीर साफ है—नोटिस जारी हो चुके हैं, कोर्ट आदेश दे चुका है, लेकिन कोरबा में बाउंड्रीवाल लगातार खड़ी होती जा रही है।

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