ट्रंप की दोहरी रणनीति? बातचीत के संकेत भी, ईरान पर अमेरिका-इस्राइल का भीषण हमला भी

Madhya Bharat Desk
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आखिर ट्रंप क्या चाहते हैं—जंग या संवाद?

पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान से बातचीत के संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी ओर ईरान पर अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। सवाल उठ रहा है—क्या यह दबाव की कूटनीति है या बड़े युद्ध की प्रस्तावना?

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनाई की मौत के बाद क्षेत्र में हालात तेजी से बदले। रविवार को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर व्यापक हमले किए। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में जोरदार धमाके सुनाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारतों की खिड़कियां कांप उठीं और आसमान में धुएं के घने बादल छा गए।

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

ट्रंप का कड़ा रुख, लेकिन बातचीत के दरवाजे खुले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिकी सैनिकों की मौत का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष खत्म होने से पहले और जानें जा सकती हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान का नया नेतृत्व आगे आता है तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि संवाद की पहल हो चुकी है और वे इसके लिए सहमत हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ हो सकती है—यानी पहले सैन्य दबाव, फिर कूटनीतिक समाधान।

तेहरान पर बड़े पैमाने पर हमला

इस्राइल का दावा है कि उसने एक साथ 100 लड़ाकू विमानों से तेहरान में ईरान की वायुसेना, मिसाइल कमान और आंतरिक सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाया।

अमेरिकी सेना के अनुसार, B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर भारी बम गिराए। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के नौ युद्धपोत नष्ट कर दिए गए और उसके नौसैनिक मुख्यालय को गंभीर क्षति पहुंची है।

ईरान का पलटवार, इस्राइल और खाड़ी देश निशाने पर

हमलों के जवाब में ईरान ने इस्राइल और खाड़ी देशों की ओर मिसाइलें दागीं। यरुशलम और बीट शेमेश में हमलों की खबर है, जहां कई लोगों की मौत और दर्जनों घायल होने की पुष्टि हुई।

ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला ने भी इस्राइल पर रॉकेट दागे। जवाब में इस्राइली वायुसेना ने बेरुत में हवाई हमले किए।

खाड़ी देशों में भी तनाव

संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन ने भी अपने क्षेत्रों में मिसाइल हमलों की पुष्टि की है। कई जगह एयरपोर्ट, होटल और अन्य नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन कुछ जगह नुकसान की खबरें हैं।

तेहरान में सन्नाटा और दहशत

तेहरान की सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। लोग घरों में कैद हैं और जगह-जगह सुरक्षा चौकियां तैनात कर दी गई हैं। ईरान के सरकारी प्रसारण केंद्र को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है।

दक्षिणी ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हमले में 165 लोगों की मौत का दावा किया गया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

क्या है आगे की राह?

सवाल अब भी वही है—क्या ट्रंप की रणनीति युद्ध के जरिए बातचीत की मेज तक पहुंचने की है? या पश्चिम एशिया एक लंबे और विनाशकारी संघर्ष की ओर बढ़ रहा है?

दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन, तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह टकराव कूटनीति में बदलेगा या युद्ध की आग और भड़केगी।

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