रायपुर।छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर विधानसभा से पारित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 के अब तक पूरी तरह लागू नहीं होने पर सवाल उठने लगे हैं। अखिल भारतीय जनसंघ के प्रदेश महामंत्री प्रतीक पाण्डेय ने राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर अधिनियम के क्रियान्वयन में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है।
पत्र में कहा गया है कि विधानसभा से कानून पारित हुए करीब ढाई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसे राजपत्र में प्रकाशित नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इससे कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया है, जो सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।


प्रतीक पाण्डेय ने अपने पत्र में दो अहम मुद्दों का उल्लेख किया है। पहला, अधिनियम की धारा 1(3) के अनुसार कानून तभी लागू माना जाएगा जब राज्य सरकार इसकी अधिसूचना राजपत्र में जारी करेगी। उनका कहना है कि 2 जून 2026 तक ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि कानून के सभी प्रावधान पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किए जाएं, न कि अलग-अलग चरणों में।
दूसरा मुद्दा अधिनियम के तहत नियम बनाए जाने का है। पत्र में कहा गया है कि धारा 30 के तहत राज्य सरकार को नियम बनाने का अधिकार दिया गया है, लेकिन अब तक नियम तैयार नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि नियमों के बिना किसी भी कानून का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है।
30 जून तक कार्रवाई की मांग
अखिल भारतीय जनसंघ ने गृह मंत्री से आग्रह किया है कि 30 जून 2026 तक कानून को राजपत्र में प्रकाशित कर उसके नियमों को अंतिम रूप दिया जाए, ताकि इसे पूरे राज्य में समान रूप से लागू किया जा सके। संगठन ने यह भी कहा है कि इस प्रक्रिया में वह सरकार को हरसंभव सकारात्मक सहयोग देने के लिए तैयार है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के गृह विभाग ने 19 मार्च 2026 को विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पेश किया था। सदन से पारित होने के बाद यह अधिनियम का रूप ले चुका है, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन की प्रक्रिया अभी बाकी है।





