“27 महीनों में 6.28 लाख बहनें कम, कमलनाथ बोले – जवाब दो सरकार!”

Madhya Bharat Desk
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मध्यप्रदेश सरकार की चर्चित लाड़ली बहना योजना को कभी महिलाओं की आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार बताया गया था। इसे प्रदेश की “गेम चेंजर” योजना कहकर प्रचारित किया गया। लेकिन अब सामने आए ताज़ा आंकड़ों ने इस योजना की जमीनी हकीकत पर बहस तेज कर दी है।

पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधायक कमलनाथ ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सरकार से सीधा सवाल पूछा है। कमलनाथ का कहना है कि यदि योजना वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए थी, तो 27 महीनों में 6.28 लाख बहनों के नाम सूची से कैसे कम हो गए?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2023 में 131.07 लाख महिलाएँ इस योजना से जुड़ी थीं। लेकिन जनवरी 2026 तक यह संख्या घटकर 124.78 लाख रह गई। कमलनाथ ने कहा कि यह गिरावट केवल आंकड़ों की कमी नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर असर है।

कमलनाथ ने विशेष रूप से 21 से 23 वर्ष आयु वर्ग की 1.88 लाख युवतियों के नाम शून्य हो जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या यह योजना युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नहीं थी? यदि 10 अगस्त 2023 के बाद नए पंजीयन बंद कर दिए गए और राशि बढ़ाने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है, तो फिर सरकार योजना के विस्तार की बात कैसे कर रही है?

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह भी कहा कि 25,395 महिलाओं का भुगतान सिर्फ तकनीकी कारणों से रोक दिया गया। उनके अनुसार, जिन परिवारों के लिए यह राशि घर चलाने का सहारा है, उनके खाते में भुगतान रुक जाना संवेदनहीनता दर्शाता है। कमलनाथ ने मांग की कि ऐसी तकनीकी खामियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए और लंबित भुगतान बिना देरी के जारी किए जाएं।

सरकार की ओर से यह दलील दी जा रही है कि कई महिलाएँ 60 वर्ष की आयु पार कर चुकी थीं, इसलिए उनके नाम सूची से हटे। लेकिन कमलनाथ का कहना है कि 6 लाख से अधिक की कमी को केवल इस आधार पर नहीं समझाया जा सकता। यदि नए पंजीयन बंद रहेंगे, तो संख्या घटती जाएगी—ऐसे में योजना को मजबूत बताना वास्तविकता से दूर है।

विधानसभा में भी जब इस विषय पर जवाब मांगा गया, तो कमलनाथ ने कहा कि सत्ता पक्ष के पास संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करना आसान है, लेकिन उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

कमलनाथ ने मांग की कि:

  • नए पंजीयन तत्काल शुरू किए जाएं
  • लंबित भुगतान शीघ्र जारी किए जाएं
  • योजना की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए

कमलनाथ के अनुसार, लाड़ली बहना योजना केवल सरकारी दस्तावेजों का विषय नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की उम्मीद है जो हर महीने मिलने वाली सहायता पर निर्भर हैं। अब प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि 6.28 लाख बहनों की कमी का जिम्मेदार कौन है और जिनका भुगतान अटका है, उन्हें न्याय कब मिलेगा।

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