राज्यसभा सीट पर कांग्रेस की बढ़ी बेचैनी, कमलनाथ ही बन सकते है ‘संकटमोचक’!

Madhya Bharat Desk
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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा सीट को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस खेमे में इस बार चिंता साफ दिखाई दे रही है डर यही है कि कहीं दूसरे राज्यों की तरह यह सीट भी हाथ से न निकल जाए। इसी आशंका के बीच पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो न सिर्फ विधायकों को साथ ला सके, बल्कि संभावित ‘क्रॉस वोटिंग’ को भी रोक सके।

पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि कई नामों पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन एक नाम ऐसा है जिस पर लगभग सभी की सहमति बनती दिख रही है पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ। माना जा रहा है कि उनके नाम पर विधायक आसानी से एकजुट हो सकते हैं, यही वजह है कि अब कांग्रेस के लिए उनका साथ “जरूरी” ही नहीं, बल्कि “अनिवार्य” होता जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि भाजपा इस सीट पर समीकरण बिगाड़ने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, जानकार मानते हैं कि यदि कमलनाथ मैदान में उतरते हैं, तो विधायकों में किसी तरह की टूट-फूट कर पाना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के भीतर भी इस सीट को लेकर पूरी तरह एकमत नहीं दिख रहा। जिन संभावित नामों पर विचार किया जा रहा है, उन्हें लेकर पार्टी के अपने नेता ही पूरी तरह सहमत नहीं हैं। ऐसे में मुकाबला और भी पेचीदा होता नजर आ रहा है।

उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी कमलनाथ के नाम पर सकारात्मक रुख दिखाया है। पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भले सार्वजनिक बयान न दिया हो, लेकिन सूत्रों का दावा है कि उन्होंने भी आलाकमान को अपनी सहमति दे दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर जो अन्य नाम सामने आए हैं, उनके साथ जोखिम यह है कि उनके अपने क्षेत्र के विधायक भी मतदान के समय चौंका सकते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस अब ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है जो संगठन और विधायकों दोनों के बीच भरोसा कायम कर सके।

संगठन को भी साधने की कोशिश

कमलनाथ के समर्थन में सामने आए नेताओं का मानना है कि उनकी सक्रियता से प्रदेश में कांग्रेस को नई ऊर्जा मिल सकती है। लंबे समय से संगठन में पकड़ रखने वाले नेता के तौर पर उनकी छवि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा पैदा करती है।

दरअसल, बीते कुछ समय से कांग्रेस प्रदेश में संघर्ष के दौर से गुजर रही है। कार्यकर्ताओं में निराशा भी दिखने लगी है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व पर यह दबाव भी है कि वह ऐसा फैसला ले, जो न सिर्फ राज्यसभा की सीट बचाए, बल्कि संगठन को भी मजबूती दे।

फिलहाल सबकी नजर कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर टिकी है। माना जा रहा है कि जल्द ही उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा हो सकती है और अगर सब कुछ इसी दिशा में रहा, तो कमलनाथ का नाम सबसे आगे रह सकता है।

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