इंदौर शहर में बढ़ते ट्रैफिक और अव्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट की अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने BRTS की लेन तोड़ने में हो रही देरी पर नाराज़गी जताते हुए कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को तलब किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि 15 दिन के भीतर BRTS की एक तरफ की लाइन का हिस्सा तोड़कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।
शहर में जाम की समस्या लंबे समय से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता ने ट्रैफिक सुधार से जुड़े कई मुद्दों को अदालत के सामने रखा। कोर्ट ने वकीलों की पाँच सदस्यीय कमेटी बनाकर शहर के ट्रैफिक प्रबंधन पर निगरानी रखने और अपनी रिपोर्ट देने को कहा है।
सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव मौजूद रहे। कोर्ट ने अगली सुनवाई में DCP ट्रैफिक को भी उपस्थित रहने के आदेश दिए। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि प्रशासन के निर्देशों के बावजूद रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में डीजे बजना, धार्मिक चबूतरों पर अतिक्रमण, शाम के समय अचानक बढ़ता ट्रैफिक दबाव—ये सभी चीजें समस्या को और बढ़ा रही हैं।
इसके अलावा शहर के प्रमुख गार्डनों और चौराहों पर बने अवैध निर्माण, फुटपाथों पर अतिक्रमण और BRTS लेन के कारण आम लोगों को होने वाली दिक्कतों का मुद्दा भी कोर्ट में उठाया गया। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए सभी आदेशों का पालन अनिवार्य है।
अब कोर्ट ने 16 दिसंबर की तारीख तय कर दी है। उससे पहले BRTS की एक लेन तोड़ने की स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी और कलेक्टर, निगम कमिश्नर एवं DCP ट्रैफिक को फिर से कोर्ट में हाज़िर होना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि शहर के ट्रैफिक को सुधारना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें देरी अस्वीकार्य है।



