नई दिल्ली/गुवाहाटी।असम की राजनीति में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जितेंद्र सिंह व गौरव गोगोई के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का सिविल और आपराधिक मानहानि मुकदमा दायर किया है। विवाद की जड़ 12,000 बीघा जमीन से जुड़े आरोप हैं, जिन्हें लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बयानबाज़ी चल रही थी।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि इन आरोपों से उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को ठेस पहुंची है। उन्होंने बताया कि 9 फरवरी 2026 से इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सरमा ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच से बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाना कानून के दायरे में आता है।
दरअसल, 4 फरवरी को गुवाहाटी में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया था कि पार्टी की आंतरिक जांच में यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में करीब 12,000 बीघा जमीन पर कथित रूप से कब्जा किया है। मुख्यमंत्री ने इन दावों को पूरी तरह निराधार और मानहानिकारक बताया।
इससे पहले भी सरमा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वे राजनीतिक आरोपों से घबराने वाले नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को चुनौती दी थी कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो अदालत में ठोस सबूत पेश किए जाएं।
राजनीतिक तनातनी यहीं तक सीमित नहीं रही। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई और उनकी ब्रिटिश पत्नी के कथित विदेशी संपर्कों को लेकर भी सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है और सरकार के पास कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
अब 500 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा इस सियासी टकराव को अदालत की चौखट तक ले आया है। आने वाले दिनों में यह मामला न सिर्फ असम, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।



