छत्तीसगढ़ के विकास पथ पर “छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047” का लोकार्पण केवल एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य को सामूहिक रूप से गढ़ने का एक सशक्त आह्वान है। ‘अंजोर’ यानी उजाला-यह नाम उस रोशनी का प्रतीक है, जो नीति, नियोजन और जनभागीदारी के त्रिवेणी संगम से 2047 तक ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की परिकल्पना को साकार करने का भरोसा जगाती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा समर्पित तथा वित्त एवं योजना मंत्री ओ.पी. चौधरी जी के सक्रिय योगदान एवं मार्गदर्शन से तैयार किया गया यह दृष्टिपत्र, ‘विकसित भारत@2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक और संसाधनगत संभावनाओं के साथ जोड़ते हुए, राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है।
इस विज़न की सबसे बड़ी शक्ति इसकी स्पष्टता और समयबद्धता में निहित है। अल्पकालिक (2030), मध्यकालिक (2035) और दीर्घकालिक (2047) लक्ष्यों का निर्धारण बताता है कि यह केवल एक महत्वाकांक्षी सपना नहीं, बल्कि नीति आयोग, विशेषज्ञों, विभागों और व्यापक जन-भागीदारी (जैसे ‘मोर सपना मोर विकसित छत्तीसगढ़’ मंच) के माध्यम से तैयार किया गया एक सुविचारित, लोकतांत्रिक नियोजन का दस्तावेज है। यह सहभागी शासन का सशक्त उदाहरण है जहाँ जन-आकांक्षाओं को नीतिगत आधार प्रदान किया गया है।
आर्थिक मोर्चे पर ‘अंजोर विज़न’ की परिकल्पना साहसिक है। 2047 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को ₹75 लाख करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य, राज्य की पारंपरिक शक्तियों और नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के संतुलित समन्वय से जुड़ा है। एक ओर जहाँ स्टील, कोयला और खनिज संसाधनों में वृद्धि पर जोर है, वहीं दूसरी ओर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर, आईटी और लॉजिस्टिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश छत्तीसगढ़ को भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और रेल नेटवर्क का विस्तार राज्य को राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला का एक अपरिहार्य केंद्र बनाने की क्षमता रखता है।
समानांतर रूप से, सामाजिक विकास इस विज़न की आधारशिला है। बेरोज़गारी को 1 प्रतिशत से नीचे लाने का यथार्थवादी लक्ष्य कौशल विकास और निवेश सुधारों पर आधारित है। स्वास्थ्य क्षेत्र में 100% आयुष्मान कवरेज, मेडीसिटी की स्थापना और शिक्षा में शिक्षकविहीन स्कूलों का अंत, पीएम श्री स्कूल और ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी जैसी पहलें राज्य की मानव पूंजी को सशक्त करने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।
इस विज़न में पर्यावरणीय संतुलन और टिकाऊ विकास पर दिया गया जोर इसे समकालीन बनाता है। 44% वन क्षेत्र को ‘ऑक्सीजन हब’ के रूप में संरक्षित करने, सर्कुलर इकोनॉमी को अपनाने और नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों में अग्रणी भूमिका निभाने का संकल्प स्पष्ट करता है कि विकास की रोशनी प्रकृति के संरक्षण की शर्त पर ही स्थायी हो सकती है। यह दृष्टिकोण विकास और पर्यावरण के द्वंद्व को संतुलन में साधने का एक अभिनव प्रयास है।
अंततः, यह पूरा विज़न शासन सुधारों की एक ठोस बुनियाद पर टिका है। सिंगल विंडो 2.0, एक क्लिक में मंज़ूरी, नागरिक सहभागिता पोर्टल और सैकड़ों नीतिगत सुधारों का वादा यह सुनिश्चित करने का भरोसा जगाता है कि योजनाएँ कागज़ से निकलकर ज़मीन पर उतरेंगी।
“अंजोर से उजियार होगा प्रदेश” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक अटल विश्वास है-कि जब दिशा स्पष्ट हो, संकल्प दृढ़ हो और मेहनत सामूहिक हो, तब उजाला निश्चित होता है। अब जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। इस विज़न को एक साझा सपना मानकर, हमें अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी।
यदि नीति की रोशनी को जनभागीदारी के दीप से ऊर्जा मिलती रही, तो इसमें कोई संशय नहीं कि 2047 का छत्तीसगढ़ सचमुच विकसित भारत की अग्रिम पंक्ति में खड़ा एक आलोकित प्रदेश होगा।



