छत्तीसगढ़ में सरकारी खर्चों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, पिछले एक साल से भी कम समय में पुलिस विभाग ने किराए की गाड़ियों पर करीब 130 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं।

इसके अलावा सरकारी और निजी वाहनों के डीजल और मरम्मत पर 148 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च हुई है। यानी कुल मिलाकर यह खर्च लगभग 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
बताया जा रहा है कि कई अधिकारियों के पास एक से ज्यादा सरकारी या अटैच्ड वाहन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल कई बार निजी कामों जैसे घर-परिवार के काम या घूमने-फिरने के लिए भी किया जाता है।
वहीं, मंत्री और नेताओं के काफिलों में भी कई गाड़ियाँ साथ चलती हैं। विभाग के पास पहले से ही हजारों सरकारी वाहन हैं, फिर भी इतने बड़े पैमाने पर निजी वाहन किराए पर लिए जा रहे हैं। अगर इस पर नियंत्रण हो तो सरकारी खर्च में काफी बचत हो सकती है।
उधर रायपुर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर भी समस्या देखने को मिली है। कई पंप सुख गए है, जबकि HP, BP और IO के कुछ पंप तो सुबह से बंद देखे जा रहे है।
चर्चा यह भी है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका के कारण कुछ लोगों ने पहले से ज्यादा ईंधन भरवा लिया है, या वजह कुछ और है अभी साफ नहीं है।
कुल मिलाकर, स्थिति को देखते हुए अब मितव्ययता और संसाधनों के सही उपयोग की जरूरत पर जोर देना उचित होगा।







