रायपुर/आरंग।छत्तीसगढ़ सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान किया जा रहा है। लेकिन राजधानी रायपुर से सटे आरंग क्षेत्र की जमीनी हकीकत इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रही है।
आरंग की सहकारी समितियों में 23 जनवरी से धान बेचने वाले कई किसान आज 17 दिन बाद भी अपनी उपज की कीमत के इंतजार में बैठे हैं। बैंक खातों में राशि न पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
किसान नेता पारसनाथ साहू ने बताया कि पहले किसानों को धान बेचने के 24 घंटे के भीतर भुगतान मिल जाता था। इससे उन्हें अगली फसल की तैयारी, खाद-बीज की व्यवस्था और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में आसानी होती थी। लेकिन इस बार भुगतान में हो रही देरी ने किसानों को असमंजस में डाल दिया है।
“सरकार 48 घंटे में भुगतान का दावा कर रही है, लेकिन हमारे क्षेत्र में 17 दिन बीत चुके हैं,” एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर कहा। उनका कहना है कि समय पर राशि न मिलने से कर्ज चुकाने में दिक्कत हो रही है और बाजार में उधारी भी बढ़ रही है।
किसानों की मांग
प्रभावित किसानों ने सरकार से मांग की है कि:
- लंबित भुगतान की प्रक्रिया में तत्काल तेजी लाई जाए।
- 24 घंटे में भुगतान की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए।
- तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को तुरंत दूर किया जाए।
किसान संगठनों ने साफ किया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आगे की रणनीति तय करने को मजबूर होंगे।
राजधानी से लगे इलाके की यह स्थिति सवाल खड़े कर रही है कि जब यहां भुगतान में देरी है, तो दूर-दराज के इलाकों का हाल क्या होगा?


