रायपुर। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। Right to Education (RTE) के तहत होने वाले एडमिशन में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है, जिसमें दो निजी स्कूलों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
मामले में गुरुकुल पब्लिक स्कूल, महाराजपुर और अशोका पब्लिक स्कूल, मजगांव पर आरोप है कि उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नियमों के साथ छेड़छाड़ की। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन ने नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर पोर्टल में जानबूझकर गलत हैबिटेशन कोड दर्ज किया।
जांच में सामने आया कि दोनों स्कूल वास्तव में ग्रामीण क्षेत्र में स्थित हैं, लेकिन उन्होंने खुद को शहरी क्षेत्र का दिखाने के लिए एक ही गलत कोड का इस्तेमाल किया। इस गड़बड़ी का सीधा असर उन जरूरतमंद बच्चों पर पड़ सकता है, जिन्हें RTE के तहत प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
शिकायत मिलने के बाद गठित जांच समिति ने स्पष्ट किया कि दोनों स्कूलों के असली कोड अलग-अलग हैं, लेकिन पोर्टल में एक ही कोड दर्ज कर दिया गया। इससे पूरी एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ गए हैं।
रिपोर्ट में इसे गंभीर लापरवाही और नियमों का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही, स्कूल प्रबंधन और संबंधित नोडल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल और गहराते जा रहे हैं।
वहीं, युवा कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है। संगठन का आरोप है कि दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन करेंगे।







