आज संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक विपक्षी सांसदों का मार्च दिल्ली पुलिस के भारी गतिरोध और तनातनी के बीच शुरू होते ही खत्म हो गया. लेकिन इसी बहाने आज फिर से राहुल गांधी, पूरा विपक्ष और चुनाव आयोग को लेकर उनके सवाल सुबह से लगातार टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक तैर रहे हैं.
इस प्रतिकात्मक मार्च का उद्देश्य भी शायद यही बताना था कि विपक्ष चुनाव आयोग को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर बैठने के मूड में कतई नहीं है. विपक्ष देश और संविधान के हित में जवाब चाहता है. जवाब बंद कमरे में नहीं बल्कि खुल्लम-खुल्ला.
दिल्ली पुलिस के रोके जाने पर राहुल गांधी के नेतृत्व में तमाम विपक्षी सांसद सड़क पर ही प्रदर्शन करने लगे. राहुल गांधी इस मौके पर मार्च में शामिल सांसदों और मीडिया के जरिए देश को संबोधित करना चाहते थे. लेकिन दिल्ली पुलिस ने राहुल के हाथों से माइक छीन लिया और उनके साथ-साथ प्रदर्शन कर रहे तमाम विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया.
लेकिन सवालों का हल्ला हिरासत के हथकंडों से कहां दबता है. सवाल है कि चुनाव आयोग आखिर फर्जी वोट बनाने के आरोपों पर चुप क्यों है? सवाल है कि बिहार में जारी वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर सरकार सदन में चर्चा करने को तैयार क्यों नहीं है?
लोकसभा का मानसून सत्र जारी है. स्वाभाविक है अगर सरकार बिहार के SIR पर सदन में चर्चा कर ले तो सड़कों पर प्रदर्शन की ज़रूरत नहीं होगी.



