अमेरिका का भारत पर 50% टैरिफ वार! iPhone एक्सपोर्ट पर फिलहाल राहत, लेकिन आगे बढ़ सकती है मुश्किल

Madhya Bharat Desk
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अमेरिका और भारत के बीच व्यापार तनाव नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले सामान पर कुल 50% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। इसमें पहले से लागू 25% शुल्क के साथ अतिरिक्त 25% टैरिफ शामिल है। यह फैसला 27 अगस्त 2025 से लागू होगा, जिससे दोनों देशों के पास बातचीत के लिए तीन सप्ताह का समय होगा। ट्रंप ने इस कदम का कारण भारत द्वारा रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस का अप्रत्यक्ष समर्थन बताया है।

iPhone को मिली अस्थायी छूट
हालांकि, इस बड़े फैसले के बीच Apple और उसके अमेरिकी ग्राहकों के लिए थोड़ी राहत है। अप्रैल 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इस टैरिफ से छूट दी थी। इसका मतलब है कि भारत में बने iPhone (जिसमें आगामी iPhone 17 सीरीज भी शामिल है) की कीमत पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा। Apple के CEO टिम कुक के अनुसार, अमेरिका में बिकने वाले अधिकांश iPhone अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं।

भविष्य में बढ़ सकती है चुनौती
यह छूट स्थायी नहीं है और कभी भी खत्म हो सकती है। ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि “कोई भी देश बख्शा नहीं जाएगा” और उन्होंने सेमीकंडक्टर उत्पादों पर भी टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं। यदि भविष्य में यह छूट समाप्त होती है, तो ‘मेड इन इंडिया’ iPhone की कीमतें अमेरिकी बाजार में बढ़ सकती हैं।

भारत iPhone उत्पादन का हब
Apple पिछले कुछ वर्षों से चीन पर निर्भरता घटाकर भारत में iPhone का उत्पादन बढ़ा रही है। इसका कारण चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध से बचना और उत्पादन लागत को नियंत्रित करना है। भारत में बने बेस मॉडल iPhone को अमेरिका में बेचा जाता है, लेकिन अब ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति से Apple के उत्पादन और बिक्री पर खतरा मंडरा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि Apple टैरिफ से बचना चाहता है, तो उसे अमेरिका में ही iPhone बनाना होगा।

Apple की रणनीति
अमेरिकी सरकार के सख्त रुख को देखते हुए Apple ने अमेरिका में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। इसमें केंटकी में स्थित ग्लास फैक्ट्री का विस्तार शामिल है, जो अब दुनियाभर के iPhone और Apple Watch के लिए ग्लास का उत्पादन करेगी। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी सरकार को संतुष्ट करना और भविष्य के टैरिफ के खतरे को कम करना है।

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