खाकी की साठगांठ पर उठे सवाल: FIR लिखने के बजाय 2 घंटे TI चैंबर में बैठा रहा आरोपी रजिस्ट्रार!
दुर्ग:हेमचंद यादव विश्वविद्यालय (दुर्ग) के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के वेतन से राशि जबरन ऐंठने और पद के दुरुपयोग का मामला अब पुलिस की संदिग्ध भूमिका को लेकर गरमा गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में मोहन नगर थाना पुलिस द्वारा अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। बीते दिन जैसे ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय से आवेदन पत्र मोहन नगर थाने पहुंचा, थाना प्रभारी (TI) कोसले ने त्वरित कार्रवाई करने के बजाय आरोपी कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को सीधे थाने बुलवा लिया।
पत्नी और वकीलों के साथ पहुंचे कुलसचिव, फिर कमियां निकालकर टाला मामला
सूत्रों का दावा है कि बुलावा मिलते ही कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप अपनी पत्नी और दो अधिवक्ताओं के साथ मोहन नगर थाने पहुंचे। वे करीब 2 घंटे तक TI कोसले के चैंबर में ही मौजूद रहे। इस लंबी बैठक के बाद, थाना प्रभारी ने विश्वविद्यालय द्वारा सौंपे गए पक्के डिजिटल व बैंक साक्ष्यों को दरकिनार करते हुए दस्तावेजों में “कमियां” होने का हवाला दिया और FIR दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने अपनी ढिलाई को छिपाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के नाम एक पत्र जारी कर दिया।
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पीड़िता के घर पहुंचे कुलसचिव दंपत्ति, रात 8 बजे तक बयान बदलने का बनाते रहे दबाव
एक तरफ जहां थाने में आरोपी का खातिरदारी भरा स्वागत हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता को डराने-धमकाने का खेल शुरू हो गया। सूत्रों के अनुसार, कुलसचिव और उनकी पत्नी सीधे शिकायतकर्ता महिला कर्मचारी (शुभांगी मराठे) के घर पहुंच गए। दोनों रात 8 बजे तक पीड़िता के घर में ही डटे रहे और उस पर पुलिस के समक्ष अपना बयान बदलने के लिए लगातार मानसिक दबाव बनाते रहे।
CSP को सूचना के बाद पहुंची पुलिस टीम ने भी पीड़िता को ही धमकाया
पीड़िता पर बनाए जा रहे दबाव की सूचना जब सीएसपी को दी गई, तो उन्होंने एक पुलिस टीम शिकायतकर्ता के घर भेजी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने आरोपी कुलसचिव पर कार्रवाई करने या उसे वहां से हटाने के बजाय उल्टा पीड़ित महिला शुभांगी मराठे को ही धमकाना शुरू कर दिया।
रात में थाने बुलाने पर पीड़िता ने किया इनकार, अब भी FIR का इंतजार
घटनाक्रम के दौरान थाने से पीड़िता शुभांगी मराठे को रात 8 बजे ही थाने उपस्थित होने के लिए कहा जा रहा था। हालांकि, पीड़िता ने रात के समय थाने जाने से साफ मना कर दिया और स्पष्ट कहा कि वह अगले दिन सुबह अपने पति के साथ ही थाने आएगी।
विश्वविद्यालय की उच्चस्तरीय फैक्ट-फाइंडिंग जांच समिति द्वारा 100% बैंक एंट्रीज और साक्ष्यों का मिलान किए जाने के बावजूद, मोहन नगर पुलिस द्वारा मामले को अटकाना, आरोपी को थाने में शरण देना और पीड़िता को पुलिस बल के जरिए धमकाना, पूरे पुलिस प्रशासन की साख और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। खबर लिखे जाने तक मामले में पुलिस द्वारा कोई FIR दर्ज नहीं की गई है।





