छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नवंबर में पहली बार डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस (DG-IG Conference) की मेजबानी करने जा रही है। यह सम्मेलन 28 नवंबर से शुरू होगा और 30 नवंबर तक चलेगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के शीर्ष पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शामिल होंगे। इस प्रतिष्ठित कॉन्फ्रेंस का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 नवंबर को करेंगे।
इस आयोजन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, मुख्य सचिव और गृह सचिव शामिल होंगे। कॉन्फ्रेंस में देश की आंतरिक सुरक्षा, नक्सल विरोधी अभियान, साइबर सुरक्षा और ड्रग्स तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश में नक्सल मुक्त भारत अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। लगातार चल रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन के कारण माओवादी संगठनों में दो फाड़ की स्थिति बन गई है। माओवादी इतिहास में पहली बार कुछ गुटों ने शांति वार्ता के लिए हथियार छोड़ने की इच्छा जताई है। ऐसे में यह कॉन्फ्रेंस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कॉन्फ्रेंस में नक्सल विरोधी अभियानों के अलावा देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती राज्यों में ड्रग्स की तस्करी, और अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स कार्टेल की गतिविधियों पर भी फोकस रहेगा। पड़ोसी मुल्कों से ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विचार-विमर्श होगा।
गौरतलब है कि 2014 से यह कॉन्फ्रेंस हर साल अलग-अलग राज्यों में आयोजित की जा रही है। इससे पहले इसका आयोजन दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, भुवनेश्वर, पुणे, गुवाहाटी, कच्छ, केवड़िया, हैदराबाद और ग्वालियर में हो चुका है। इस बार पहली बार छत्तीसगढ़ को इसकी मेजबानी का अवसर मिला है, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।
इस सम्मेलन के जरिए केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्यों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करना और 2026 तक नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करना है।






