रायपुर। राजीव स्मृति वन, रायपुर में शुक्रवार को 22वें वन शहीद दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान वनों और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले प्रदेश के वन शहीदों को वन विभाग और शासन की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
खेजड़ली के ऐतिहासिक बलिदान की याद में मनाया जाता है दिवस
11 सितंबर का दिन राजस्थान के मारवाड़ रियासत के खेजड़ली गांव में वर्ष 1730 में हुए ऐतिहासिक बलिदान की याद में मनाया जाता है। अमृता देवी बिश्नोई सहित 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। भारत सरकार ने वर्ष 2013 में अधिसूचना जारी कर इस दिन को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस घोषित किया था। हालांकि, छत्तीसगढ़ में यह दिवस वर्ष 2005 से लगातार मनाया जा रहा है।

1985 से अब तक 36 वनकर्मियों ने दी शहादत
कार्यक्रम में बताया गया कि छत्तीसगढ़ का करीब 44 प्रतिशत अभिलिखित वन क्षेत्र वन अमले की मेहनत और निगरानी पर निर्भर है। वर्ष 1985 में जशपुर के वनरक्षक स्वर्गीय बुधराम भगत से लेकर वर्ष 2025 में कांकेर के वनपाल स्वर्गीय नारायण सिंह यादव तक, वन और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए शहादत देने वाले वनकर्मियों की लंबी परंपरा रही है। वर्ष 1985 से अब तक प्रदेश के 36 वनकर्मी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए प्राण गंवा चुके हैं।
अधिकारियों ने कहा कि वनरक्षक, वनपाल और परिक्षेत्र अधिकारी दुर्गम जंगलों में वन माफिया, तस्करों, नक्सली हिंसा और वन्यजीवों से जुड़े खतरों के बीच लगातार काम करते हैं।

शहीद परिवारों से भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने पर जोर
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ हॉफ) अरुण कुमार पांडे ने वन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शहीद परिवारों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए अनुग्रह राशि से जुड़े प्रशासनिक प्रयास जारी हैं। हालांकि, आर्थिक मदद के साथ-साथ इन परिवारों से भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे शहीद परिवारों के साथ लगातार संपर्क में रहें, ताकि उन्हें वन विभाग के बड़े परिवार का हिस्सा होने का एहसास बना रहे और वे खुद को अकेला न समझें।

उन्होंने कहा कि वन शहीद दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि वन सुरक्षा के लिए नया संकल्प लेने का दिन भी है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कई शहीदों के परिजन अनुकंपा नियुक्ति के बाद स्वयं वन विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें श्रीमती अन्नपूर्णा साहू, श्री मनोज जायसवाल, श्री रामविलास सिंह और श्रीमती तुलसा मरकाम जैसे नाम शामिल हैं, जो अपने पिता या पति के अधूरे कर्तव्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
स्मारिका का विमोचन, वन सुरक्षा की शपथ
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव ने शहीद परिवारों के कल्याण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि अनुकंपा नियुक्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, उत्कृष्ट कार्य करने वाले वनकर्मियों को वानिकी दिवस 2027 में सम्मानित करने की बात कही गई।
इस अवसर पर एक विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया गया, जिसमें वन शहीदों का जीवन-वृत्त और उनके परिवारों से जुड़े कल्याणकारी प्रावधान शामिल हैं। कार्यक्रम का समापन वन सुरक्षा की सामूहिक शपथ के साथ हुआ। अधिकारियों ने कहा कि जंगल केवल वन विभाग की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की साझा धरोहर हैं। इनकी रक्षा में हर नागरिक की भागीदारी ही वन शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।






