बस्तर में बदली तस्वीर: आत्मसमर्पित नक्सलियों को आजीविका से जोड़ रहा तुंगल ईको-टूरिज्म

Madhya Bharat Desk
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सुकमा।जिले में आत्मसमर्पित नक्सलियों और उनके परिवारों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल की गई है। तुंगल ईको-टूरिज्म स्थल पर आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा संचालित स्व-सहायता समूहों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के लिए 6 पैडल बोट और 12 कैंपिंग टेंट सौंपे गए।

यह पहल वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई है। इसका उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक व स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही तुंगल की प्राकृतिक खूबसूरती को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

नई सुविधाओं से पर्यटकों को बोटिंग और कैंपिंग का बेहतर अनुभव मिल सकेगा। वहीं, स्व-सहायता समूहों को इन गतिविधियों के माध्यम से आय का साधन भी उपलब्ध होगा।

कार्यक्रम में कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर, डीएफओ अक्षय भोसले और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

सरकार का कहना है कि तुंगल ईको-टूरिज्म स्थल को विकसित करने के साथ-साथ आत्मसमर्पित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।

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