रायपुर।छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली 200 यूनिट तक ‘हाफ बिजली बिल’ योजना पर अब कार्यप्रणाली और मीटर रीडिंग के समय चक्र को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विद्युत उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) के कर्मचारियों और निजी एजेंसियों द्वारा समय पर रीडिंग न लेकर जानबूझकर देरी की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की खपत 200 यूनिट की सीमा को पार कर जाए और वे सब्सिडी के दायरे से बाहर हो जाएं।
हाल ही में सामने आई एक बिलिंग पर्ची ने इस पूरे गणित को उजागर कर दिया है। इसमें उपभोक्ता की मासिक खपत ठीक 201 यूनिट दर्ज हुई है। नियम के मुताबिक 200 यूनिट तक की खपत पर ऊर्जा प्रभार (Energy Charge) में 50 प्रतिशत की छूट मिलती है, लेकिन महज 1 यूनिट अधिक होते ही उपभोक्ता का बिल पूरा का पूरा जारी कर दिया गया।
इस महीने एक उपभोक्ता का बिल
- पिछली रीडिंग: 14390
- वर्तमान रीडिंग: 14591
- कुल खपत: 201 यूनिट
- नियत मांग प्रभार: ₹190.00
- ऊर्जा प्रभार: ₹896.00
- विद्युत शुल्क: ₹105.00
यदि यह रीडिंग 30 दिनों के सटीक चक्र पर ली गई होती, तो खपत 195 से 198 यूनिट के बीच रहती और उपभोक्ता को योजना का सीधा लाभ मिलता। लेकिन 2 से 3 दिन की देरी से ली गई रीडिंग के कारण 201 यूनिट का आंकड़ा आ गया और छूट का दायरा खत्म हो गया।

जानबूझकर देरी या प्रशासनिक लापरवाही?
उपभोक्ताओं का कहना है कि 30 दिन के बजाए 33 से 35 दिनों में रीडिंग लेना कोई इत्तेफाक नहीं है। यदि हर महीने 2-3 दिन की देरी की जाएगी, तो सामान्य दैनिक खपत (6-7 यूनिट प्रतिदिन) के हिसाब से 200 यूनिट की सीमा पार होना तय है। इससे कंपनी का राजस्व बढ़ता है और उपभोक्ता को जेब ढीली करनी पड़ती है। मीटर रीडिंग का काम अधिकांश क्षेत्रों में आउटसोर्स एजेंसियों के पास है। रीडर्स के पास कार्यभार अधिक होने या तय शेड्यूल का पालन न करने के कारण बिलिंग साइकिल आगे खिसक जाती है, जिसका खामियाजा सीधे आम जनता भुगत रही है।
नियामक आयोग के नियम और उपभोक्ता का अधिकार
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के मानकों के अनुसार बिलिंग चक्र 30 दिन (+/- 2 दिन) का होना चाहिए। यदि मीटर रीडिंग लगातार लेट हो रही है, तो उपभोक्ता इसके खिलाफ विरोध दर्ज करा सकते हैं।
लेट रीडिंग की समस्या से बचने के लिए उपभोक्ता निर्धारित तिथि पर खुद ऐप के माध्यम से मीटर की फोटो अपलोड करके ‘सेल्फ रीडिंग’ दर्ज कर सकते हैं।
बिलिंग चक्र 32-35 दिन होने पर संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE) या संभागीय कार्यालय में शिकायत देकर बिल संशोधन का अनुरोध किया जा सकता है।





