रायपुर:छत्तीसगढ़ भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन में चल रहा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। रायपुर सांसद और संस्था के निर्वाचित अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य सरकार के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को संगठन का पदेन अध्यक्ष घोषित किया गया है। इस कदम के बाद सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर मौजूद मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हाई कोर्ट में दायर याचिका में बृजमोहन अग्रवाल ने संगठन के नियमों और संशोधित प्रावधानों का हवाला देते हुए सरकार के फैसले को नियमविरुद्ध बताया है। उनका तर्क है कि नियमानुसार शिक्षा मंत्री को केवल संरक्षक यानी पैट्रन की भूमिका दी गई है, जबकि अध्यक्ष पद के लिए किसी भी प्रकार के पदेन प्रावधान का उल्लेख नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्वाचित अध्यक्ष को केवल उसके स्वयं के इस्तीफे या नियमानुसार प्रक्रिया के तहत ही हटाया जा सकता है, न कि किसी सरकारी आदेश के जरिए।
यह विवाद केवल पद को लेकर ही नहीं है, बल्कि इसके साथ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी जुड़े हुए हैं। सांसद ने जंबूरी आयोजन से जुड़े कार्यों में लगभग 15 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई है। आरोप है कि राज्य सरकार से प्राप्त लगभग 10 करोड़ रुपये की राशि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के आधिकारिक खाते में जमा न होकर बालोद जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इसके अलावा, राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही निर्माण और भुगतान किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
जंबूरी आयोजन के लिए स्थल को नया रायपुर से बदलकर बालोद किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि निर्वाचित परिषद ने इन कथित अनियमितताओं के चलते जंबूरी को स्थगित करने का निर्णय लिया था, लेकिन राज्य सरकार ने परिषद के फैसले को दरकिनार करते हुए आयोजन जारी रखने के निर्देश दे दिए। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जंबूरी से संबंधित एक सोशल मीडिया पोस्ट का अचानक हटाया जाना भी चर्चा का विषय बना रहा।
सांसद ने हाई कोर्ट से जंबूरी आयोजन पर रोक लगाने के साथ-साथ शिक्षा मंत्री को पदेन अध्यक्ष बनाए जाने के आदेश को निरस्त करने की मांग की है। इस मामले में मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा सचिव को भी पक्षकार बनाया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमों में मंत्री की भूमिका केवल संरक्षक तक सीमित है, तो अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति को न्यायिक कसौटी पर टिकाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हाई कोर्ट का फैसला न केवल भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन के भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और सत्ता संतुलन पर भी इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है।
देखे आधिकारिक आदेश
https://drive.google.com/file/d/1dxUmqV8STS2MmqHZKo-81kddZmTmfsuc/view?usp=drivesdk







