साय सरकार में धान घोटाला: कभी चूहे, कभी दीमक, अब 5.71 करोड़ का धान गायब

Madhya Bharat Desk
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रायपुर/महासमुंद।छत्तीसगढ़ की साय सरकार में धान के रखरखाव को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले कबीरधाम जिले में करीब 7 करोड़ रुपये के धान को चूहों के खाते में डाल दिया गया, अब महासमुंद जिले के बागबाहरा से भी कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 10 महीनों में 18,433 क्विंटल धान गायब हो गया, जिससे सरकार को 5.71 करोड़ रुपये का नुकसान बताया जा रहा है।

इस पूरे मामले में हैरानी की बात यह है कि धान संग्रहण केंद्र के संचालकों ने इस भारी-भरकम नुकसान के लिए चूहे, दीमक और चिड़ियों को जिम्मेदार ठहरा दिया है। संचालकों के दावे के मुताबिक, इन जीव-जंतुओं ने लगातार 10 महीनों तक हर घंटे करीब 256 किलो धान खा लिया।

दावों से परे दिख रही है सच्चाई

हालांकि, इन दलीलों पर सवाल उठना लाज़मी है। क्योंकि धान के सुरक्षित भंडारण के लिए सरकार मार्कफेड के माध्यम से करोड़ों रुपये खर्च करती है। इसमें परिवहन, हमाली, सुरक्षा उपकरण और रखरखाव जैसी तमाम व्यवस्थाएं शामिल होती हैं। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना लापरवाही से ज्यादा, भ्रष्टाचार की आशंका को जन्म देता है।

केंद्र प्रभारी का पक्ष

बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र के प्रभारी का कहना है कि

“2024-25 में केंद्र में 12.63 लाख बोरा धान आया था। आवक के समय नमी 17% थी और जावक के वक्त यह 10-11% रही। संग्रहण के दौरान दीमक, कीट, पक्षी और चूहे धान को नुकसान पहुंचाते हैं।”

3.65% शॉर्टेज, फिर भी कार्रवाई नहीं

मार्कफेड के डीएमओ ने बताया कि बागबाहरा केंद्र में 3.65 प्रतिशत शॉर्टेज पाया गया है और प्रभारी को नोटिस जारी किया गया है। खाद्य संचालनालय के सचिव के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की बात कही जा रही है।

वहीं, महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह ने कहा,

“फिलहाल मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। डीएमओ से रिपोर्ट लेकर जांच की जाएगी। अगर गड़बड़ी पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।”

नियम क्या कहते हैं?

विभागीय नियमों के अनुसार—

  • 1% तक कमी: कारण बताओ नोटिस
  • 1% से 2% तक कमी: विभागीय जांच
  • 2% से अधिक कमी: निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर

इसके बावजूद बागबाहरा केंद्र में 3.65% शॉर्टेज सामने आने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या साय सरकार में करोड़ों का धान सच में चूहे खा रहे हैं, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल छिपा है?

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