सोनपुरी (छत्तीसगढ़):
गांव छोटा था, पर जज़्बा बड़ा। जैसे ही सूरज की पहली किरण ने सोनपुरी की धरती को छुआ, डमरू की थाप और “जय भीम!” के नारों से आसमान गूंज उठा। हर चेहरे पर गर्व था, हर दिल में एक ही नाम — डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर!
इस वर्ष भी सोनपुरी के लोगों ने धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस को सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि समानता की अग्नि को फिर से प्रज्वलित करने वाला उत्सव बना दिया।
️ भीम के अनुयायियों का संगम
बौद्ध उपासक और उपासिकाएं बड़ी संख्या में एकत्र हुए — बलिराम गोड़ाने, अरुण गौतम, पायल गोड़ाने, संदीप गजभिये, डॉ. प्रभात घुले, अमन गौतम, सुजल बिसेन, सागर तेकाम, राजेश तेकाम, रितिक कामड़े, नीलेश, रमेश, बिशन, रजित और अनगिनत ग्रामीण।
सभी ने एक स्वर में कहा —
“हम भेदभाव नहीं, बंधुत्व चाहते हैं। हम अन्याय नहीं, समानता चाहते हैं।”
️ 1956 की वह रात जिसने भारत को बदल दिया
14 अक्टूबर 1956 — नागपुर का दीक्षाभूमि।
हजारों दीपक जल रहे थे, लाखों आंखों में उम्मीद थी। और जब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा — “अब मैं हिंदू नहीं, मैं बौद्ध हूं”, तब इतिहास ने करवट ली।
यह सिर्फ धर्म परिवर्तन नहीं था, यह सदियों के अन्याय के खिलाफ विद्रोह था।
आज वही भावना सोनपुरी की हवा में तैर रही थी। बच्चे हाथों में नीले झंडे लहरा रहे थे, महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं, और बुजुर्गों की आंखों में गर्व के आँसू थे।
कार्यक्रम में विचार और वचन
सभा में वक्ताओं ने कहा —
“धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस सिर्फ एक तिथि नहीं, यह वह दिन है जब इंसान ने इंसान बनना चुना।”
लोगों ने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा की, और आंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
हर भाषण, हर नारा, हर तालियां — सबमें एक ही संदेश गूंज रहा था —
“Educate, Agitate, Organize!”
सोनपुरी बना संदेश का केंद्र
देशभर की तरह सोनपुरी ने भी दिखाया कि बौद्ध समाज सिर्फ अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है।
यह उत्सव सिर्फ श्रद्धा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का उत्सव बन गया।
हर कोने से आवाज आई —
“हम बराबरी के लिए लड़े हैं, और लड़ते रहेंगे।”
✊ अंत में गूंजा प्रण
दीक्षाभूमि की प्रतिज्ञा को दोहराते हुए, ग्रामीणों ने संकल्प लिया —
“जब तक अन्याय का एक भी अंश इस धरती पर रहेगा, तब तक हमारे भीतर भीम का धम्म जीवित रहेगा।”
सोनपुरी की मिट्टी ने आज फिर कहा —
“हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं —
क्योंकि बाबासाहेब ने हमें सिर झुकाना नहीं, सिर ऊंचा रखना सिखाया है।”







