छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्यकर्मियों का आंदोलन अब और उग्र हो गया है। धरना स्थल पर नारों और भाषणों के साथ-साथ तंज भरे गीत भी गूंज रहे हैं। कर्मचारियों का दर्द और आक्रोश गीतों की पंक्तियों में साफ झलक रहा है। “तूने वो रंगीले क्या जादू किया, छत्तीसगढ़ सरकार ने हमें धोखा दिया” जैसे गीत सरकार के खिलाफ नाराजगी और विरोध का स्पष्ट संदेश दे रहे हैं।
महिला कर्मचारी भी इस आंदोलन में पीछे नहीं हैं। त्योहार का मौसम है और तीज की तैयारियां चल रही हैं। महिलाएं धरना स्थल पर ही मेहंदी रचते हुए कह रही थीं— “त्योहार भी मनाएंगे और अपनी लड़ाई भी लड़ेंगे।” इस दृश्य ने आंदोलन को और भी खास बना दिया, जहां एक ओर संघर्ष की तपिश थी तो दूसरी ओर त्योहार की खुशबू भी घुली हुई थी।
आंदोलन ने धीरे-धीरे जनता का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह उनकी मजबूरी की लड़ाई है। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और सरकार तक उनकी आवाज़ नहीं पहुंचती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
धरना स्थल की तस्वीरें आंदोलन की पूरी कहानी कह रही हैं। खून से लिखा पत्र, नारों की गूंज, विरोध के गीत और मेहंदी रचती महिलाएं मिलकर संघर्ष और जीवन का अनोखा संगम पेश कर रही हैं। यह आंदोलन न केवल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने ला रहा है, बल्कि कर्मचारियों की हिम्मत और हक की लड़ाई को भी मजबूती से दर्शा रहा है।







