कोरबा। राख परिवहन और पर्यावरणीय लापरवाही का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। शंकर इंजीनियरिंग की कार्यप्रणाली में सामने आई अनियमितताओं ने HTPP प्रबंधन को मुश्किल में डाल दिया है। इस मामले में अब सरकारी विभागों को सीधे आर्थिक और पर्यावरणीय नुकसान झेलना पड़ रहा है।
हसदेव नदी के जल प्रदूषण को लेकर जल संसाधन विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए HTPP प्रबंधन पर ₹18 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब नगर निगम आयुक्त ने कटघोरा एसडीओ को लिखे पत्र में नदी में मिल रहे दूषित पानी को तत्काल रोकने के निर्देश दिए थे।
जांच में यह बात सामने आई है कि राख परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। आरोप है कि राखड़ डेम से राख निकाले बिना ही फर्जी बिल बनाए गए। यानी वास्तविक काम किए बिना ही कागजों में पूरा कार्य दिखाकर भुगतान लिया गया। इस मामले में ठेकेदार और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।
इस पूरे प्रकरण से यह स्थिति बन गई है कि गलती किसी और की, लेकिन खामियाजा सरकारी संस्थाओं को भुगतना पड़ रहा है। ठेकेदार की लापरवाही और कथित सांठगांठ का बोझ अब HTPP प्रबंधन पर आ गया है, जबकि पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई भी सरकारी तंत्र को करनी पड़ रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला केवल जुर्माने और नोटिस तक ही सीमित रह जाएगा।



