सरगुजा: हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमण डेका को एक ज्ञापन सौंपकर अदानी कंपनी द्वारा किए जा रहे अवैध खनन, जंगलों की कटाई और ज़मीन पर जबरन कब्जे को तुरंत रोकने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सरगुजा, कोरबा और सूरजपुर जिले में फैले हसदेव अरण्य क्षेत्र, जो संविधान की पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है, में ग्रामसभा की अनुमति के बिना खनन और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
परसा कोल ब्लॉक के लिए साल्ही, हरिहरपुर और फतेहपुर ग्राम पंचायतों के नाम पर फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव तैयार कर वन स्वीकृति हासिल की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2018 से वे लगातार विरोध कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन ने अनदेखी की।
पूर्व राज्यपाल अनसुइया उइके द्वारा 2022 में खनन प्रक्रिया रोकने और फर्जी प्रस्तावों की जांच के निर्देश दिए गए थे। छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की 4 नवंबर 2024 की रिपोर्ट में भी ग्रामसभा प्रस्तावों को फर्जी बताया गया, फिर भी अदानी कंपनी ने बलपूर्वक कार्य जारी रखा।
ग्रामवासियों ने बताया कि पुलिस बल की मौजूदगी में उनकी निजी खेती की ज़मीन पर बुलडोजर चलाए गए। किसान आनंद राम खुसरो की धान लगी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया गया, और विरोध करने पर उल्टे ग्रामीणों पर ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने 26 जुलाई 2022 को सर्वसम्मति से हसदेव के सभी कोल ब्लॉक रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बावजूद खनन गतिविधियाँ जारी हैं, जिससे हसदेव नदी, मिनीमाता बांध, और पूरे क्षेत्र की जैवविविधता को खतरा है।
भारतीय वन्य जीव संस्थान की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि खनन से मानव-हाथी संघर्ष विकराल रूप ले सकता है और पर्यावरणीय असंतुलन स्थायी हो सकता है।
संघर्ष समिति ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करें, फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों की जांच कराएं, अवैध खनन रोके और अदानी कंपनी की मनमानी पर सख्त कार्रवाई करें।



