कमलनाथ का राज्यसभा जाना लगभग तय हो चुका है। कमलनाथ और कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच हुई दिल्ली में चर्चा ने यह और स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस उन्हें राज्यसभा भेजने के फैसले पर गंभीरता से आगे बढ़ रही है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि मध्यप्रदेश से कांग्रेस अपना बड़ा दांव खेलने जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशी के तौर पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में इस नाम पर विचार-विमर्श पूरा हो चुका है और इसे अंतिम मंजूरी की दिशा में देखा जा रहा है।

मध्यप्रदेश का राज्यसभा गणित
मध्यप्रदेश में कुल 230 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 58 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के अनुसार राज्य में तीन सीटों के लिए चुनाव की स्थिति बनती दिख रही है।
- कांग्रेस के पास करीब 65 विधायक हैं
- एक सीट सुरक्षित करने के लिए 58 वोटों का आंकड़ा जरूरी है
- अगर कांग्रेस के कुछ विधायकों के पाला बदलने की स्थिति बनती है, तो समीकरण प्रभावित हो सकता है
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि 5–6 विधायकों की स्थिति बदलती है तो कांग्रेस के लिए एक सीट पर चुनौती खड़ी हो सकती है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सकती है, जबकि बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस को अपने विधायकों को एकजुट रखना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर बीजेपी के पास लगभग 164 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है, जिससे पार्टी दो सीटों पर मजबूत स्थिति में मानी जा रही है।
राजनीतिक महत्व
कमलनाथ को राज्यसभा भेजे जाने की संभावित तैयारी को कांग्रेस के लिए रणनीतिक कदम माना जा रहा है। वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते वे पार्टी संगठन और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। यदि उनका नाम अंतिम रूप से तय होता है, तो यह कांग्रेस के लिए मध्यप्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा।





