नई दिल्ली |
भारत ने ऐतिहासिक ‘मराठा सैन्य परिदृश्य’ (Maratha Military Landscapes) को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए औपचारिक नामांकन भेजा है। यह प्रस्ताव यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति (WHC) की 47वीं बैठक में पेश किया गया है, जो 6 जुलाई से 16 जुलाई 2025 तक पेरिस में आयोजित की जा रही है।
मराठा सैन्य विरासत को वैश्विक मान्यता की ओर कदम
‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ भारत की सैन्य स्थापत्य और रणनीतिक इतिहास का गौरवपूर्ण हिस्सा हैं। 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच निर्मित ये किले मराठा साम्राज्य की युद्धनीति और रक्षा व्यवस्था का बेहतरीन उदाहरण हैं। भारत को अब पेरिस में चल रही बैठक के समापन तक अंतिम निर्णय का इंतजार है।
कुल 12 किले शामिल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से चयन
इस नामांकन में जिन 12 किलों को सम्मिलित किया गया है, वे हैं – साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खांदेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग (सभी महाराष्ट्र में) और जिन्जी किला (तमिलनाडु)। इन किलों की विशेषता यह है कि वे पहाड़ों, समुद्रतटों और मैदानी इलाकों में रणनीतिक दृष्टिकोण से बनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा मूल्यांकन
यूनेस्को की इस बैठक में भारत सहित कुल 32 नए स्थलों के नाम पर विचार किया जा रहा है। साथ ही दो विश्व धरोहर स्थलों की सीमाओं में संशोधन के प्रस्तावों पर भी चर्चा हो रही है। अन्य प्रस्तावों में कैमरून, मलावी और यूएई जैसे देशों के सांस्कृतिक परिदृश्य भी शामिल हैं।
हर देश से एक नामांकन
यूनेस्को के 2023 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक देश एक बार में केवल एक ही स्थल नामांकित कर सकता है। भारत ने इस चक्र में ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ को प्राथमिकता दी है।
नामांकन की सफलता के मायने
अगर यह नामांकन सफल रहता है तो भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इससे पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और इन किलों के संरक्षण के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।







