नई दिल्ली:
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों डीवाई चंद्रचूड़ और जेएस खेहर ने संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के समक्ष ‘एक देश, एक चुनाव’ प्रस्ताव पर अपने विचार रखते हुए कहा कि यह अवधारणा भारतीय संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करती।
जेपीसी की आठवीं बैठक में दोनों पूर्व CJI ने यह स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को दी गई अतिरिक्त शक्तियों पर अवश्य विचार होना चाहिए, लेकिन एक साथ चुनाव कराना संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध नहीं है।
संविधान संशोधन की ओर बढ़ता कदम
वर्तमान में, संसद में दो विधेयकों पर चर्चा चल रही है— संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और संघ राज्य क्षेत्र (कानून) संशोधन विधेयक। इनका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 12 दिसंबर 2024 को इन विधेयकों को मंजूरी दी थी, लेकिन विपक्ष के विरोध के बाद इन्हें संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया।
जेपीसी कर रही है गहन विचार-विमर्श
भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली 39 सदस्यीय संसदीय समिति इस विषय पर कानूनी विशेषज्ञों, न्यायविदों और राज्यों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रही है।
पूर्व न्यायाधीश यूयू ललित और रंजन गोगोई ने भी समिति के समक्ष फरवरी और मार्च में अपनी राय रखते हुए विधेयक के कुछ बिंदुओं पर सुझाव दिए थे, हालांकि उन्होंने इसकी संवैधानिकता पर प्रश्न नहीं उठाए थे।
जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि विभिन्न राज्यों में अधिकांश नागरिक और राजनीतिक दल इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं। महाराष्ट्र समेत 5 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश के दौरे में यह देखने को मिला कि अधिकांश प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, हालांकि कुछ ने चिंताएं भी जताईं।



