“पहाड़े भूल गए बच्चे, सरकार गिन रही उपलब्धियां!”

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर।

देश की नई पीढ़ी जब पहाड़े भूल रही है, तब सरकार नई शिक्षा नीति की कामयाबी का ढोल पीटने में व्यस्त है। “परख” नाम के सर्वे ने साफ दिखा दिया है कि शिक्षा के मंदिरों में ज्ञान नहीं, सिर्फ आंकड़े चढ़ रहे हैं। सर्वे के अनुसार छठी कक्षा के केवल 53 फीसदी बच्चों को 10 तक का पहाड़ा याद है। बाकी बच्चे शायद सोच रहे हैं – “पहाड़े क्यों याद करें, जब नौकरी ही नहीं मिलेगी?”

किताबें भारी, समझदारी हल्की

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के “ज्ञान मूल्यांकन” सर्वे में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाखों बच्चों को शामिल किया गया, लेकिन नतीजे देख सरकार की आंखें खुलने की बजाय और मीठे सपने देखने लगीं। तीसरी कक्षा के सिर्फ 55% बच्चे 1 से 99 तक की गिनती को सही क्रम में लिख सकते हैं। और छठी के सिर्फ 53% बच्चे जोड़-घटाव या गुणा समझ पा रहे हैं। बाकी को शायद यही सिखाया जा रहा है – “पास होना है, नंबर की चिंता क्यों?”

सरकारी स्कूलों में ‘बोर्ड’ लटक रहे, ज्ञान नहीं

सर्वे ने यह भी दिखाया कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों का गणित से नाता कमजोर हो गया है। और रही-सही कसर निजी स्कूलों ने पूरी कर दी – विज्ञान में थोड़ा अच्छा किया लेकिन गणित में वे भी फिसड्डी निकले।

“गणित में 46%, बाकी में भगवान भरोसे!”

छात्रों को सबसे कम अंक गणित में मिले – मात्र 46%। जबकि भाषा में 57% और ‘द वर्ल्ड अराउंड अस’ में 49% ही स्कोर कर पाए। शिक्षा मंत्रालय कहता है कि इससे बच्चों की सीखने की क्षमता का फर्क पता चलता है। लेकिन सवाल यह है – “क्या सरकार को फर्क समझ में आया?”

केवी की शान और सरकारी सिस्टम की थकान

केंद्रीय विद्यालयों के नौवीं के बच्चों ने अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन किया है – शायद इसलिए कि वहां शिक्षक अब भी पढ़ाते हैं, आंकड़े नहीं गिनते। तीसरी कक्षा में वहीं केवी के बच्चों ने गणित में सबसे खराब प्रदर्शन किया – “शायद टीचर भी सोच रहे होंगे कि पहली नौकरी थी, बच्चों से ही सीख लेंगे।”

ग्रामीण बनाम शहरी – मुकाबला बराबरी का नहीं रहा

गांव के बच्चों ने तीसरी कक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि शहरी क्षेत्रों के छात्र छठी और नौवीं में बाज़ी मार ले गए। इससे साफ होता है कि शिक्षा का स्तर क्षेत्र अनुसार डगमगाता रहता है – और नीति निर्माता ‘एक राष्ट्र, एक शिक्षा नीति’ का सपना देख रहे हैं।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment