NGT नियमों की उड़ रही खुलेआम धज्जियां? अडानी समूह पर नदी प्रदूषित करने का आरोप

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। अडानी समूह द्वारा NGT के पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों और निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? हसदेव अरण्य क्षेत्र से सामने आए आरोपों ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है। दावा है कि अडानी समूह से जुड़ी कोयला खदान और कोल वॉशरी से निकलने वाला प्रदूषित पानी साल्ही नाला के रास्ते हसदेव की सहायक नदी अटेम में सीधे बहाया जा रहा है।

यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो मामला केवल नदी प्रदूषण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि NGT के निर्देशों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, Consent to Operate (CTO) की शर्तों और जल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

NGT और पर्यावरण कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन क्यों माना जा सकता है?

कोल वॉशरी से निकलने वाले अपशिष्ट जल के प्रबंधन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति और संचालन अनुमति में कई शर्तें निर्धारित की जाती हैं। इनमें पानी के उपचार, ठोस पदार्थों को अलग करने और पुनर्चक्रण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं।

जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) का सवाल: यदि संबंधित कोल वॉशरी की CTO या पर्यावरणीय स्वीकृति में Zero Liquid Discharge की शर्त लागू है, तो उद्योग को पानी के पुनर्चक्रण और अपशिष्ट जल के समुचित प्रबंधन की व्यवस्था करनी होती है। ऐसी स्थिति में बिना अनुमति या निर्धारित शर्तों के विरुद्ध पानी को किसी प्राकृतिक नाले में छोड़ना गंभीर उल्लंघन हो सकता है।

कोल वॉशरी में Thickener और Sedimentation Ponds (सेटलिंग टैंक) जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग पानी से ठोस कण और कोयले की गाद अलग करने के लिए किया जाता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित इकाई पर वास्तव में ZLD की कौन-सी शर्त लागू है और क्या उसके CTO में प्राकृतिक जलमार्ग में किसी भी प्रकार की निकासी पर रोक है।

अटेम और हसदेव नदी तंत्र पर प्रदूषण का खतरा

आरोप है कि साल्ही नाला के रास्ते कोल वॉशरी का प्रदूषित पानी अटेम नदी में पहुंचाया जा रहा है। अटेम हसदेव नदी तंत्र से जुड़ी है, इसलिए इस दावे की पुष्टि होने पर प्रदूषण के संभावित प्रभावों की जांच नदी के व्यापक जलग्रहण क्षेत्र को ध्यान में रखकर करनी होगी।

प्राकृतिक जलमार्गों में बिना उपचारित या मानकों के विपरीत औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ना जल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। कोल वॉशरी के पानी में कोयले की महीन गाद, ठोस कण और अन्य प्रदूषक हो सकते हैं, जिनका असर जलीय जीवन, कृषि और स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ सकता है।

इस मामले में कानूनी रूप से क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

यदि स्थानीय स्तर पर प्रशासन या संबंधित कंपनी की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है, तो उपलब्ध साक्ष्यों के साथ संबंधित प्राधिकरणों और न्यायिक मंचों के समक्ष शिकायत की जा सकती है। इसके लिए वीडियो, फोटो, निकासी स्थल का विवरण और पानी के वैज्ञानिक परीक्षण जैसे साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

1. NGT में याचिका

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम, 2010 की धारा 14 और 15 के तहत पर्यावरणीय विवादों, पर्यावरण को हुए नुकसान और राहत/क्षतिपूर्ति से जुड़े मामलों में NGT के समक्ष आवेदन का प्रावधान है। प्रभावित व्यक्ति या संगठन उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला उठा सकते हैं।

मामले में NGT से निम्नलिखित मांगें की जा सकती हैं:

  • स्वतंत्र एजेंसी से स्थल निरीक्षण और जांच।
  • साल्ही नाला तथा अटेम नदी के पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच।
  • संबंधित कोल वॉशरी की पर्यावरणीय स्वीकृति और CTO की शर्तों की समीक्षा।
  • प्रदूषण की पुष्टि होने पर जिम्मेदार इकाई के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई।
  • पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर Environmental Compensation।
  • प्रदूषण रोकने के तत्काल उपाय और प्रभावित जल स्रोतों की बहाली।

NGT परिस्थितियों के अनुसार जांच, विशेषज्ञ समिति या अन्य उपयुक्त राहत के निर्देश दे सकता है। हालांकि, स्वतः संज्ञान लेना या किसी विशेष प्रकार की कार्रवाई करना मामले के तथ्यों और ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र पर निर्भर करेगा।

2. CECB को आधिकारिक शिकायत

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) को जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 के तहत शिकायत भेजकर तत्काल स्थल निरीक्षण और जल नमूनों की जांच की मांग की जा सकती है।

शिकायत में यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जा सकता है कि:

  • प्रदूषित पानी किस स्थान से निकल रहा है।
  • वह किस नाले या जलमार्ग में जा रहा है।
  • संबंधित खदान या कोल वॉशरी की पहचान क्या है।
  • क्या निकासी के लिए कोई अनुमति है।
  • क्या पानी का उपचार और पुनर्चक्रण किया जा रहा है।

3. कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन

जल स्रोतों को प्रदूषित करने की शिकायत जिला प्रशासन के समक्ष भी प्रस्तुत की जा सकती है। कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन से संयुक्त निरीक्षण, संबंधित विभागों को जांच के निर्देश तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग की जा सकती है।

हसदेव में खनन विस्तार के बीच जवाबदेही का सवाल

हसदेव अरण्य में नई कोयला खदानों के आवंटन और पर्यावरणीय स्वीकृतियों को लेकर पहले से बहस जारी है। ऐसे में यदि मौजूदा खनन या कोल वॉशरी से नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने का आरोप सही साबित होता है, तो यह पर्यावरणीय निगरानी व्यवस्था और सरकारी विभागों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

क्या अडानी समूह से जुड़ी कोल वॉशरी NGT और पर्यावरणीय स्वीकृति की सभी शर्तों का पालन कर रही है? क्या अटेम नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी? और यदि उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

हसदेव के जंगलों और नदियों की सुरक्षा केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन, जल और आजीविका से जुड़ा सवाल है। इसलिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई आवश्यक है।

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