अडानी के लिए आदिवासी, जंगल, हाथी—सब कुर्बान? हसदेव में कोयले की राजनीति
रायपुर।हसदेव-अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी ने छत्तीसगढ़ में एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है: क्या विधानसभा का सर्वसम्मत संकल्प, आदिवासी अधिकार और पर्यावरण की चिंताएं अब केवल कागज की कार्रवाई भर रह गई हैं?
संकल्प बनाम सत्ता: 2022 का वादा कहां गया?
26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था कि हसदेव-अरण्य में कोई नया कोल ब्लॉक नहीं दिया जाएगा। जून 2023 में राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर तारा समेत 9 ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने का अनुरोध किया; इसमें वन-जलवायु विभाग की सिफारिशों और विधानसभा संकल्प का हवाला दिया गया था। अक्टूबर 2023 में केंद्र ने तारा समेत 40 ब्लॉकों को डी-नोटिफाई भी किया था।
लेकिन दिसंबर 2025 में अचानक राज्य सरकार ने पत्र लिखकर तारा ब्लॉक को वापस नीलामी में शामिल करने का अनुरोध किया। सवाल यह है: क्या एक नई सरकार का पत्र, विधानसभा के संकल्प और पिछली सरकार की पर्यावरणीय आपत्तियों को रद्द करने के लिए पर्याप्त है?

2023 के चुनावी वादे की अवमानना?
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने हसदेव बचाने का संकल्प लिया था। लेकिन अब जब नीलामी हुई है और विजेता कंपनी अडानी समूह से जुड़ी बताई जा रही है, तो यह वादा खोखला लगता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सीधा सवाल किया है: “क्या एक पूंजीपति के लिए आप छत्तीसगढ़ के आदिवासी, यहाँ के समृद्ध जंगल, पर्यावरण, वन्य प्राणी, मिनीमाता बांगो जलाशय सबका विनाश कर देंगे?”

पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की कुर्बानी?
हसदेव-अरण्य को छत्तीसगढ़ की आत्मा माना जाता है—यहां हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका, संस्कृति और पहचान जुड़ी है। तारा ब्लॉक लगभग 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसमें 4,000 एकड़ से अधिक घना जंगल है; खनन से 10 लाख से अधिक पेड़ कटने और लेमरू एलीफेंट रिजर्व/कॉरिडोर पर गंभीर असर पड़ने का खतरा है।
सवाल यह है: क्या विकास के नाम पर ऐसे फैसले पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हैं?

पारदर्शिता कहां है?
केंद्रीय कोयला मंत्रालय का कहना है कि नीलामी राज्य के 2025 के अनुरोध और ब्लॉक सीमा संशोधन के बाद ही हुई। लेकिन सरकारें अब तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई हैं:
- क्या ग्राम सभाओं की सहमति ली गई?
- क्या पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सार्वजनिक किया गया?
- क्या विधानसभा संकल्प की कानूनी स्थिति पर पुनर्विचार किया गया?
- क्या नीलामी प्रक्रिया में किसी उद्योगपति को विशेष लाभ दिया गया?
सरकार को जवाब देना होगा
अब समय है कि केंद्र और राज्य सरकारें पारदर्शिता बरतें और इन सवालों का स्पष्ट जवाब दें। यदि हसदेव वास्तव में छत्तीसगढ़ की आत्मा है, तो उसकी रक्षा केवल नारों से नहीं, बल्कि संस्थागत जिम्मेदारी और नीतिगत स्थिरता से ही संभव है।
हसदेव बचाओ समूह और कांग्रेस ने नीलामी रद्द करने और विधानसभा संकल्प को लागू करने की मांग की है; इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।





