भोपाल।मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक कमलनाथ ने आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार में आदिवासी समुदाय के साथ हर स्तर पर अन्याय हो रहा है। कमलनाथ ने कहा कि ऐसे हालात में आदिवासी समाज को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की याद आने लगी है।
कमलनाथ ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान आदिवासी हित में किए गए कई कामों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने आदिवासी परिवारों, वन अधिकार, तेंदूपत्ता संग्राहकों, साहूकारी से राहत और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण को लेकर कई फैसले लिए थे।
मुख्यमंत्री मदद योजना से आदिवासी परिवारों को सहायता
कमलनाथ ने बताया कि वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री मदद योजना शुरू की गई थी। इसके तहत आदिवासी परिवारों के पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए एक क्विंटल खाद्यान्न और 50 किलो शक्कर देने की व्यवस्था की गई। इसके अलावा आदिवासी गांवों में सामूहिक उपयोग के लिए बर्तन खरीदने के लिए करीब 31.6 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे।
वन अधिकार के दावों के लिए वन मित्र पोर्टल
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों के वनभूमि अधिकार से जुड़े दावों को ऑनलाइन दर्ज करने और पारदर्शी तरीके से उनका निराकरण करने के लिए वन मित्र पोर्टल शुरू किया गया था। इसके लिए 20 आदिवासी जिलों की 89 जनपद पंचायतों की 5,211 ग्राम पंचायतों को टैबलेट खरीदने के लिए 15 हजार रुपये प्रति पंचायत दिए गए।
खारिज वन अधिकार दावों की दोबारा जांच
कमलनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने पहले खारिज किए जा चुके आदिवासी परिवारों के वन अधिकार दावों की दोबारा समीक्षा का फैसला लिया था। जून 2019 में करीब 3.5 लाख अस्वीकृत दावों पर पुनर्विचार की घोषणा की गई थी।
उन्होंने वनभूमि से संभावित बेदखली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले पर आगे की कार्रवाई तय करने के लिए मंत्रिमंडलीय समिति बनाई गई थी। विधानसभा रिकॉर्ड में भी 2019 के निर्देश का उल्लेख है कि निरस्त या अमान्य दावेदारों को आगामी आदेश तक बेदखल न किया जाए।

तेंदूपत्ता संग्राहकों की बढ़ाई थी दर
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति मानक बोरा की थी। इससे तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रति मानक बोरा 500 रुपये अतिरिक्त मिलने लगे थे।
साहूकारों से राहत देने की पहल
कमलनाथ ने दावा किया कि अनुसूचित क्षेत्रों में बिना लाइसेंस साहूकारी पर रोक लगाने और अवैध कर्ज के बदले गिरवी रखी जमीन, आभूषण और अन्य संपत्ति वापस दिलाने की दिशा में भी उनकी सरकार ने फैसला लिया था। ब्याज और साहूकारी को नियंत्रित करने के लिए भी प्रावधान प्रस्तावित किए गए थे।
बैंकिंग सुविधा से जोड़ने की योजना
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में आदिवासियों को डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी, जिससे वे निर्धारित सीमा तक ATM से पैसे निकाल सकें और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सकें।
संस्कृति और शिक्षा पर भी जोर
कमलनाथ ने अपने कार्यकाल की गांधी दर्शन योजना का भी जिक्र किया। इसके तहत जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को साबरमती, वर्धा सहित महात्मा गांधी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण कराने की योजना शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा कि आदिवासी देवी-देवताओं के धार्मिक स्थलों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए आर्थिक सहायता देने की पहल भी की गई थी। इसका उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक स्थलों को संरक्षित करना था।
2020-25 रोडमैप में आदिवासी विकास पर जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के Vision to Delivery Roadmap 2020-25 में गरीब और वंचित वर्गों के लिए सामाजिक समानता, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई थी। आदिवासी समुदाय के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार, भूमि अधिकार और आर्थिक अवसर बढ़ाने जैसे लक्ष्य भी इसमें शामिल थे।
कमलनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने आदिवासी समुदाय को अधिकार और सम्मान देने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की थीं। उन्होंने भाजपा सरकार से आदिवासी हितों को प्राथमिकता देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।






