DMF के करोड़ों के दावों के बीच बदहाल सड़क, प्रदेश के एकमात्र क्रोकोडायल पार्क तक पहुंचना बना चुनौती

Madhya Bharat Desk
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जांजगीर-चांपा।जिले में विकास के लिए DMF (जिला खनिज न्यास) से करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अकलतरा ब्लॉक मुख्यालय से प्रदेश के एकमात्र क्रोकोडायल पार्क की ओर जाने वाली प्रमुख सड़क की बदहाली इसकी बड़ी तस्वीर पेश कर रही है। सड़क की स्थिति ऐसी है कि यहां से गुजरना वाहन चालकों और ग्रामीणों के लिए परेशानी के साथ जोखिम का कारण बन गया है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सड़क सिर्फ ग्रामीणों के आवागमन का माध्यम नहीं है, बल्कि क्रोकोडायल पार्क तक पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके बावजूद सड़क की हालत लंबे समय से सवालों के घेरे में है। जगह-जगह गड्ढे और खराब सड़क के कारण लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

करोड़ों की राशि, फिर सड़क क्यों बदहाल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में विकास कार्यों के लिए DMF जैसी मदों से बड़ी राशि उपलब्ध होने की बात कही जाती है, तो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सड़क की बदहाली दूर क्यों नहीं हो पा रही है? विकास कार्यों को लेकर लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर सड़क की स्थिति उन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर रही है।

अकलतरा से क्रोकोडायल पार्क तक की इस सड़क पर एक बार सफर करने पर कागजों में दर्ज विकास और जमीन पर दिखाई देने वाले विकास के बीच का अंतर आसानी से महसूस किया जा सकता है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के दावों पर भी सवाल

क्रोकोडायल पार्क जिले के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में शामिल है। ऐसे में वहां तक पहुंचने वाली सड़क की खराब स्थिति पर्यटन गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती है। यदि पर्यटकों को पार्क तक पहुंचने के लिए खराब और जोखिम भरे मार्ग से गुजरना पड़े, तो पर्यटन को बढ़ावा देने के दावों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति में सुधार होने से ग्रामीणों के साथ-साथ पर्यटकों को भी राहत मिलेगी। ऐसे में जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि इस मार्ग की स्थिति का जायजा लेकर जल्द सुधार कार्य शुरू कराएं, ऐसी मांग उठ रही है।

2047 तक इंतजार?

विकास की रफ्तार पर सवाल उठाते हुए स्थानीय स्तर पर तंज भी सुनने को मिल रहा है—जिस गति से सड़क की स्थिति सुधर रही है, उसे देखते हुए शायद विकसित भारत के लक्ष्य वर्ष 2047 तक यह सड़क भी विकसित हो जाए।

सवाल सीधा है जब विकास के लिए राशि उपलब्ध होने के दावे हैं, पर्यटन के लिहाज से सड़क महत्वपूर्ण है और ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं, तो जिम्मेदारों की नजर इस बदहाल सड़क पर आखिर कब पड़ेगी?

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